धमतरी: स्थानीय महाविद्यालय में पुस्तकालय अध्यक्ष दिवस (Librarian Day) को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह आयोजन न केवल पुस्तकालय एवं पुस्तक प्रेमियों के सम्मान में था, बल्कि छात्रों में पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से भी किया गया। इस दिन को विशेष रूप से डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्हें भारत में पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे कॉलेज के पुस्तकालय भवन में दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीमती रीता वर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम का उद्देश्य बताया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा, “पुस्तकालय ज्ञान का भंडार होता है और एक अच्छे पुस्तकालयाध्यक्ष की भूमिका उसी भंडार को छात्रों तक पहुँचाने में होती है।”
मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पुस्तकालय अधिकारी श्री राजीव साहू उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. रंगनाथन के योगदानों को याद करते हुए पुस्तकालय की पांच प्रमुख नियमों का भी उल्लेख किया:
- हर पुस्तक का पाठक होता है।
- हर पाठक के लिए पुस्तक होती है।
- पुस्तक का अधिकतम उपयोग होना चाहिए।
- पाठक का समय बचाना चाहिए।
- पुस्तकालय एक बढ़ता जीव है।
उन्होंने छात्रों को डिजिटल युग में भी पुस्तकालय का महत्व समझाया और कहा कि “सर्च इंजन उत्तर दे सकते हैं, लेकिन पुस्तकालय आपको सोचने के लिए प्रेरित करता है।”
छात्रों की भागीदारी
इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा भाषण, निबंध, और पोस्टर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कक्षा 12वीं की छात्रा नेहा ठाकुर ने “पुस्तकालय का महत्व” विषय पर शानदार भाषण दिया जिसे दर्शकों की खूब सराहना मिली।
कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों ने भी लाइब्रेरी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। किसी ने बताया कि कैसे पुस्तकालय ने परीक्षा की तैयारी में उनकी मदद की, तो किसी ने लाइब्रेरी को “दूसरा घर” बताया।
पुस्तक प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान एक पुस्तक प्रदर्शनी (Book Exhibition) का भी आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न विषयों पर नई और पुरानी किताबों को प्रदर्शित किया गया। इसमें साहित्य, विज्ञान, इतिहास, और समसामयिक विषयों से जुड़ी किताबें शामिल थीं।
पुरस्कार वितरण
कार्यक्रम के अंत में प्रतियोगिताओं में विजेता छात्रों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही, नियमित रूप से पुस्तकालय का उपयोग करने वाले विद्यार्थियों को “बेस्ट लाइब्रेरी यूज़र” का प्रमाण पत्र भी दिया गया। यह छात्रों को पुस्तकालय की ओर और अधिक आकर्षित करने का एक प्रयास था।
अंतिम संदेश
कार्यक्रम के समापन पर पुस्तकालयाध्यक्ष ने सभी उपस्थित छात्रों और शिक्षकों का धन्यवाद दिया और आशा जताई कि आने वाले समय में छात्र और अधिक संख्या में पुस्तकालय का उपयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में और भी गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी जो छात्रों को पढ़ाई के प्रति और प्रेरित करेंगी।
यह आयोजन छात्रों को न सिर्फ पढ़ने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें पुस्तकालय और ज्ञान के महत्व को समझाने में एक अहम भूमिका निभाता है।
📚 डॉ. एस. आर. रंगनाथन का योगदान
पुस्तकालय विज्ञान के जनक माने जाने वाले डॉ. एस. आर. रंगनाथन ने 20वीं शताब्दी में भारत में आधुनिक पुस्तकालय व्यवस्था की नींव रखी। उन्होंने “पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियम” प्रतिपादित किए, जो आज भी वैश्विक स्तर पर माने जाते हैं।
📌 Disclaimer:
यह लेख स्थानीय समाचार स्रोतों, कार्यक्रम में भाग लेने वाले छात्रों और कॉलेज प्रशासन से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। किसी प्रकार की त्रुटि या सुझाव हेतु कृपया हमें सूचित करें। यह सामग्री केवल जानकारी देने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।












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