स्कूलों में बच्चों ने लिया नशा न करने का संकल्प

स्कूलों में बच्चों ने लिया नशा न करने का संकल्पस्कूलों में बच्चों ने लिया नशा न करने का संकल्प

धमतरी: जिले के विभिन्न स्थानीय स्कूलों में आज छात्रों ने एकत्र होकर “नशा नहीं करने” का सामूहिक संकल्प लिया। यह पहल नशामुक्त समाज की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। बच्चों ने सामूहिक रूप से यह शपथ ली कि वे न सिर्फ स्वयं नशे से दूर रहेंगे, बल्कि दूसरों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत और उद्देश्य

यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाए जा रहे “नशा मुक्ति अभियान” के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य था — स्कूली बच्चों के मन में नशे के प्रति जागरूकता पैदा करना और भविष्य की पीढ़ी को इससे मुक्त रखना।

प्रत्येक स्कूल में सुबह की सभा के दौरान प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने नशामुक्ति की शपथ ली। इस अवसर पर कई स्कूलों में निबंध, चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।

शपथ का पाठ

बच्चों ने एक स्वर में यह शपथ ली:

“मैं प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि मैं जीवन भर किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करूंगा/करूंगी। मैं अपने परिवार, दोस्तों और समाज को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करूंगा/करूंगी।”

यह शपथ बच्चों के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रही थी और उनके चेहरों पर एक दृढ़ संकल्प झलक रहा था।

शिक्षकों और प्रशासन की भूमिका

स्कूलों के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने बच्चों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। शिक्षकों ने कहा कि “आज के समय में नशा युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। ऐसे में अगर बच्चे शुरुआत से ही इसके खिलाफ जागरूक हो जाएं, तो एक मजबूत और स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है।”

जिला शिक्षा अधिकारी श्री संजय वर्मा ने एक प्रेस बयान में कहा, “स्कूल शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देती, बल्कि जीवन जीने का सही तरीका भी सिखाती है। नशा मुक्ति की यह शपथ बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का अहम हिस्सा बनेगी।”

छात्रों की भागीदारी

विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों में बच्चों ने पूरे उत्साह से भाग लिया। कक्षा 9वीं के छात्र अर्जुन ने “नशे के दुष्प्रभाव” विषय पर एक प्रभावशाली भाषण दिया जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे एक सिगरेट या शराब की लत धीरे-धीरे पूरे जीवन को बर्बाद कर सकती है।

छात्रा रेशमा यादव ने कहा, “मुझे खुशी है कि मैंने आज यह संकल्प लिया। मैं अपने भाई और दोस्तों को भी समझाऊंगी कि नशा करना कितना खतरनाक है।”

चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता

कई स्कूलों में “नशा मुक्ति” पर आधारित चित्रकला और निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बच्चों ने अपने चित्रों में नशे से होने वाले नुकसान और नशामुक्त जीवन के फायदे दर्शाए।

एक चित्र में एक हाथ में शराब की बोतल और दूसरे हाथ में किताब को दिखाया गया, जिसमें संदेश दिया गया: “चुनाव आपका है – ज्ञान या विनाश।”

सामाजिक संदेश और भविष्य की दिशा

इस अभियान के माध्यम से यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों में न सिर्फ समझ है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी है। यदि ये प्रयास नियमित रूप से होते रहें, तो आने वाले समय में नशामुक्त पीढ़ी का निर्माण संभव है।

शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका भी इसमें अहम मानी जा रही है। स्कूल स्तर पर अगर समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम किए जाएं, तो बच्चों का झुकाव नशे की तरफ नहीं बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की ओर होगा।

समापन संदेश

कार्यक्रम का समापन देशभक्ति गीत और नशा मुक्ति पर एक समूह गीत की प्रस्तुति से हुआ, जिसने सबके दिलों को छू लिया।

इस तरह का अभियान आने वाले समय में समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। बच्चों में यह भावना पैदा करना कि “नशा नहीं, ज्ञान चाहिए”, समाज को मजबूत करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।


📌 Disclaimer:

यह लेख विभिन्न स्कूलों और स्थानीय समाचार स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसमें दिए गए विचार और विवरण जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। किसी प्रकार की त्रुटि, सुझाव या सुधार हेतु कृपया हमसे संपर्क करें। यह लेख किसी भी संस्था द्वारा अधिकृत नहीं है।

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