प्रकाशित: 31 अक्टूबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty 50 दोनों में तीव्र गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण वैश्विक संकेतों में कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और डेरिवेटिव्स की मासिक एक्सपायरी बताया जा रहा है।

सुबह से बाजार में गिरावट का रुझान
मार्केट खुलने के साथ ही बिकवाली का दबाव देखा गया। शुरुआती सत्र में ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों तक गिरा और निफ्टी 22,800 के नीचे पहुंच गया। आईटी, बैंकिंग, और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिला।
ट्रेडर्स के अनुसार, विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा है।
वैश्विक संकेतों और आर्थिक दबाव का प्रभाव
अमेरिकी और एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज नीति, चीन की सुस्त अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव जैसी परिस्थितियों ने निवेशकों की भावना को प्रभावित किया है।
इसके अलावा, महीने के अंतिम दिन होने वाली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के चलते भी बाजार में अस्थिरता बनी रही। निवेशक पोजिशन समायोजित करने में लगे रहे, जिससे इंडेक्स पर दबाव और बढ़ा।
किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर
आईटी और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट रही — Infosys, TCS, HDFC Bank और ICICI Bank के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऊर्जा और FMCG शेयरों में कुछ स्थिरता देखने को मिली। मेटल और रियल एस्टेट सेक्टर में भी हल्की गिरावट रही।
निवेशकों के लिए सलाह
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
- टेक्निकल एनालिस्ट्स के अनुसार, Nifty के लिए 22,700 एक मजबूत सपोर्ट लेवल है और 23,000-23,100 के बीच रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है।
- बाजार की अस्थिरता को देखते हुए फिलहाल नए निवेश से पहले स्थिरता का इंतज़ार करना बेहतर रहेगा।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। बाजार की स्थितियाँ समय-समय पर बदल सकती हैं।















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