6 दिसंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
राज्य सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े 2025 के संशोधन विधेयक को विधानसभा में पारित कर दिया है। इस विधेयक के पास होने के साथ ही छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा (Higher Education) क्षेत्र में कई नई व्यवस्थाएँ लागू होंगी, जिनका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती को बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि यह संशोधन राज्य में तेजी से बढ़ते निजी विश्वविद्यालयों की संरचना, मानकों और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए आवश्यक था।

शिक्षा क्षेत्र में बदलाव — निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पास
विधेयक का उद्देश्य और प्रमुख प्रावधान
संशोधन का मुख्य उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों में अकादमिक गुणवत्ता को सुनिश्चित करना, छात्रों के हितों की रक्षा करना और विश्वविद्यालय प्रबंधन को अधिक जवाबदेह बनाना है। नए प्रावधानों के तहत विश्वविद्यालयों को नियमित अकादमिक ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, बुनियादी ढांचे, संकाय संख्या, शोध क्षमता और पाठ्यक्रम मानकों को राज्य उच्च शिक्षा परिषद के निर्देशों के अनुरूप बनाए रखना होगा।
नियामक ढांचे में सुधार
विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय को वार्षिक रिपोर्ट, वित्तीय लेखा-जोखा और नामांकन आंकड़े सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और नियामक संस्थाओं को विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर बेहतर निगरानी रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, फर्जी डिग्री, अनियमित प्रवेश प्रक्रिया और शुल्क से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का तंत्र भी मजबूत किया गया है।
छात्रों के हित और सुरक्षा
संशोधन में छात्र सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। विश्वविद्यालयों में एंटी-रैगिंग सेल, शिकायत निवारण समिति और कैम्पस सुरक्षा मानकों को अनिवार्य किया गया है। साथ ही, यदि कोई विश्वविद्यालय आवश्यक मानकों का पालन नहीं करता है, तो उस पर जुर्माना या मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
शोध और नवाचार को बढ़ावा
नए संशोधन में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान जोड़ गया है। निजी विश्वविद्यालयों को उद्योगों, स्टार्टअप्स और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ शोध साझेदारी को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे राज्य में शोध-आधारित शिक्षा और रोजगार के अवसरों में तेजी आएगी।
विश्वविद्यालय स्थापना की नई प्रक्रिया
अब नए निजी विश्वविद्यालय के प्रस्तावों पर अनुमति देने से पहले भूमि, बुनियादी ढांचा, वित्तीय क्षमता और अकादमिक योजना की विस्तृत जांच की जाएगी। इससे केवल योग्य और सक्षम संस्थानों को ही उच्च शिक्षा क्षेत्र में प्रवेश मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
कुल मिलाकर यह संशोधन राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सरकारी सूचनाओं और समाचारों के आधार पर तैयार किया गया है। अंतिम एवं आधिकारिक जानकारी के लिए उच्च शिक्षा विभाग की विज्ञप्तियों को देखें।













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