10 दिसंबर 2025 | लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित धान मिलिंग घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए नया चार्जशीट दायर किया है। इस नए चार्जशीट में कई प्रभावशाली व्यवसायियों, राइस मिल मालिकों और कुछ सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। जाँच एजेंसी का दावा है कि इस मामले में अवैध लाभ, अनियमित धान संग्रह, मिलिंग के दौरान वजन में कमी और सरकारी राशन के दुरुपयोग जैसे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिले हैं।

क्या है धान मिलिंग घोटाला?
धान मिलिंग घोटाला उस संदर्भ से जुड़ा है जहाँ मिलर्स द्वारा धान के वजन, गुणवत्ता और मिलिंग के बाद प्राप्त चावल की मात्रा से संबंधित आंकड़ों में हेरफेर कर सरकारी कोटे का दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि कई मिल मालिकों ने अधिकारियों की मिलीभगत से कम चावल जमा कर अधिक भुगतान प्राप्त किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। यह मामला पिछले कई वर्षों से जाँच के दायरे में है और धीरे-धीरे इसके नए पहलू सामने आ रहे हैं।
नए चार्जशीट में क्या-क्या शामिल है
EOW द्वारा दायर ताज़ा चार्जशीट में वित्तीय लेन-देन, बैंक ट्रांजैक्शन, मिलिंग रिपोर्ट, कम वजन की शिकायतें और मिलर्स तथा अधिकारियों के बीच हुई कथित सांठगांठ के ठोस सबूत जोड़े गए हैं। चार्जशीट के अनुसार कुछ मिलर्स ने सरकारी धान को निजी मार्केट में बेचा, जबकि कुछ ने मिलिंग के दौरान चावल की वास्तविक मात्रा छुपाई। जाँच एजेंसी ने कई दस्तावेज़, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयान भी सम्मिलित किए हैं।
कौन-कौन आए जाँच के दायरे में
चार्जशीट में कई बड़े मिल मालिकों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन पर करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी का आरोप है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कुछ खाद्य विभाग अधिकारियों और पंचायत स्तर के कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है। EOW अधिकारियों के अनुसार आने वाले समय में और भी नाम शामिल हो सकते हैं, क्योंकि जाँच अभी जारी है।
राज्य पर आर्थिक प्रभाव
धान मिलिंग घोटाला केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं है, बल्कि यह किसानों की मेहनत, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। अनियमितताओं के कारण सरकारी भंडारण प्रणाली पर असर पड़ा, जिससे PDS में वितरण और राज्य के खाद्य संतुलन पर विपरीत प्रभाव पड़ा। करोड़ों के इस नुकसान की भरपाई, यदि आरोपी दोषी पाए जाते हैं, तो वसूली और दंडात्मक कार्रवाई के माध्यम से की जाएगी।
सरकार और EOW की आगे की कार्रवाई
EOW ने संकेत दिया है कि जाँच के अगले चरण में और गिरफ़्तारियाँ संभव हैं। सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। बताया जा रहा है कि राज्य शासन मिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने हेतु नई तकनीकें और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने पर भी विचार कर रहा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और प्रारंभिक जाँच रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की कानूनी स्थिति समय-समय पर बदल सकती है और अंतिम निर्णय न्यायालयों एवं सक्षम जाँच एजेंसियों द्वारा ही दिया जाएगा। किसी भी आधिकारिक अपडेट के लिए संबंधित सरकारी विभाग और EOW की अधिसूचनाएँ देखें।













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