गरियाबंद में भव्य ISKCON मंदिर का भूमिपूजन, 51 फीट ऊँचा शिखर बनेगा आकर्षण

गरियाबंद में भव्य ISKCON मंदिर का भूमिपूजन, 51 फीट ऊँचा शिखर बनेगा आकर्षण

दिनांक: 22 दिसंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में धार्मिक और पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यहाँ इस्कॉन (ISKCON) मंदिर के निर्माण का भूमिपूजन समारोह आयोजित किया गया, जिससे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस भव्य मंदिर का शिखर लगभग 51 फीट ऊँचा होगा, जो दूर से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगा। मंदिर निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

धार्मिक आस्था का बनेगा नया केंद्र

इस्कॉन मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का स्थल होगा, बल्कि यह आध्यात्मिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी और नियमित रूप से भजन, कीर्तन, प्रवचन और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। इससे क्षेत्र में धार्मिक चेतना को बढ़ावा मिलेगा और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होगा।

51 फीट ऊँचा शिखर बनेगा विशेष पहचान

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका 51 फीट ऊँचा शिखर होगा, जो वास्तुकला की दृष्टि से भी खास माना जा रहा है। यह शिखर पारंपरिक भारतीय मंदिर स्थापत्य शैली को दर्शाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद यह मंदिर गरियाबंद जिले की एक नई पहचान बन सकता है और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा।

पर्यटन विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस भव्य ISKCON मंदिर के निर्माण से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। गरियाबंद पहले से ही प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। नया मंदिर बनने से यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। होटल, परिवहन और स्थानीय व्यवसायों को इससे नया अवसर मिल सकता है।

स्थानीय लोगों में उत्साह

भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित रहे। लोगों का मानना है कि यह मंदिर क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। युवाओं और बच्चों के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन की भी योजना बनाई जा रही है।

कुल मिलाकर, गरियाबंद में ISKCON मंदिर का निर्माण धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और सामाजिक विकास की दृष्टि से एक बड़ी पहल मानी जा रही है। भव्य शिखर और आध्यात्मिक वातावरण के साथ यह मंदिर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी जगह बना सकता है।


Disclaimer:
यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मंदिर निर्माण, ऊँचाई, कार्यक्रमों या तिथियों से संबंधित विवरणों में समय के साथ परिवर्तन संभव है। किसी भी प्रकार की आधिकारिक और अद्यतन जानकारी के लिए इस्कॉन संस्था या संबंधित प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक घोषणाओं को ही अंतिम और प्रमाणिक माना जाए।

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