धमतरी-नगरी मार्ग पर किसानों का चक्काजाम, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य मार्ग पर हुआ विरोध प्रदर्शन

धमतरी-नगरी मार्ग पर किसानों का चक्काजाम, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य मार्ग पर हुआ विरोध प्रदर्शन

तारीख: 26 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा

पिछले सप्ताह किसानों ने किया सड़क जाम

धमतरी जिले में पिछले सप्ताह धमतरी-नगरी राज्य मार्ग पर किसानों ने चक्काजाम कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतर आए और अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार व प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। चक्काजाम के कारण इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित रहा, जिससे यात्रियों और वाहनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आक्रोश

किसानों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रमुख मांगों में फसलों के उचित दाम, समय पर धान खरीदी और भुगतान, सिंचाई सुविधा में सुधार, कृषि आदानों की उपलब्धता तथा किसानों से जुड़े अन्य स्थानीय मुद्दे शामिल थे। किसानों ने चेतावनी दी थी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।

राज्य मार्ग पर यातायात हुआ प्रभावित

चक्काजाम के चलते धमतरी-नगरी मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्कूल बसों, एंबुलेंस और दैनिक यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, किसानों ने आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को कुछ समय बाद रास्ता देने की कोशिश भी की, जिससे स्थिति पूरी तरह से न बिगड़े।

प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए थे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। कई दौर की चर्चा के बाद प्रशासन ने किसानों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

आश्वासन के बाद समाप्त हुआ चक्काजाम

प्रशासन से मिले आश्वासन के बाद किसानों ने कुछ घंटों के भीतर चक्काजाम समाप्त कर दिया। इसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हुआ। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

किसानों के मुद्दों पर समाधान की जरूरत

इस चक्काजाम ने एक बार फिर किसानों की समस्याओं को सामने ला दिया है। जानकारों का मानना है कि समय रहते संवाद और ठोस कदम उठाए जाएं, तो ऐसे आंदोलनों से बचा जा सकता है। किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि व्यवस्था को मजबूत करना सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।


डिस्क्लेमर: यह लेख स्थानीय समाचार रिपोर्ट्स, प्रत्यक्ष जानकारी और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। आंदोलन से संबंधित विवरण, समय और मांगों में स्थान एवं परिस्थितियों के अनुसार बदलाव संभव है। किसी भी निष्कर्ष से पहले संबंधित प्रशासनिक या आधिकारिक जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

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