तारीख: 4 जनवरी 2026
लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ में वर्षों से चली आ रही नक्सल समस्या को लेकर राज्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा दावा किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में अब सुरक्षा बलों को निर्णायक बढ़त मिल चुकी है और मार्च 2026 तक इस समस्या के लगभग समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब बस्तर और उसके आसपास के इलाकों में लगातार सफल ऑपरेशन किए जा रहे हैं।

नक्सल विरोधी अभियानों में आई तेजी
पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के संयुक्त अभियानों ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है। कई शीर्ष नक्सली मारे गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा बलों की रणनीति अब केवल मुठभेड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुफिया तंत्र को मजबूत कर नक्सल नेटवर्क को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।
आत्मसमर्पण नीति से बढ़ा भरोसा
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति भी इस लड़ाई में अहम भूमिका निभा रही है। कई नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्हें रोजगार, आवास और सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है, जिससे अन्य नक्सलियों में भी आत्मसमर्पण के प्रति विश्वास बढ़ा है। पुलिस का मानना है कि यह नीति नक्सल संगठन को अंदर से कमजोर कर रही है।
विकास कार्य बने बड़ी चुनौती नक्सलियों के लिए
सुरक्षा के साथ-साथ विकास कार्यों ने भी नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाई है। सड़कों, मोबाइल नेटवर्क, स्कूलों, अस्पतालों और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण इलाकों में सरकार की पहुंच बढ़ी है। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलियों का प्रभाव था, वहां अब प्रशासनिक गतिविधियां सामान्य हो रही हैं।
मार्च 2026 तक नक्सल समस्या खत्म करने का दावा
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए मार्च 2026 तक नक्सलवाद लगभग समाप्त हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक लंबी और सतत प्रक्रिया है, जिसमें सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी है। अंतिम चरण में नक्सलियों के बचे-खुचे गुटों पर फोकस किया जा रहा है।
आम जनता की भूमिका अहम
पुलिस का मानना है कि इस लड़ाई में स्थानीय जनता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों के सहयोग, सूचनाओं और विश्वास के बिना नक्सलवाद का पूरी तरह अंत संभव नहीं है। प्रशासन लगातार लोगों से संवाद बढ़ाने और विश्वास कायम करने की दिशा में काम कर रहा है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। यदि सुरक्षा, विकास और जनभागीदारी इसी तरह जारी रही, तो राज्य जल्द ही नक्सल मुक्त होने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है।
Disclaimer: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सरकारी बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य सूचना प्रदान करना है। किसी भी आधिकारिक पुष्टि या निर्णय के लिए संबंधित सरकारी विभाग या प्रामाणिक स्रोतों से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।












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