दिनांक: 9 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ‘पुन मार्गम’ अभियान के तहत कुल 63 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विभिन्न दलों से जुड़े सक्रिय सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं।

‘पुन मार्गम’ अभियान का उद्देश्य
प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा ‘पुन मार्गम’ अभियान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल हिंसा के बजाय संवाद और विकास के माध्यम से समस्या का समाधान तलाशने की दिशा में है।
सुरक्षा बलों और प्रशासन की संयुक्त भूमिका
इस सामूहिक आत्मसमर्पण के पीछे सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन की समन्वित रणनीति को अहम माना जा रहा है। लगातार संपर्क, विश्वास निर्माण और पुनर्वास योजनाओं की जानकारी देकर नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशासन का दावा है कि क्षेत्र में विकास कार्यों की गति बढ़ने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।
आत्मसमर्पण करने वालों को मिलेगा लाभ
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को राज्य सरकार की नीति के अनुसार आर्थिक सहायता, आवास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही उनके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास की यह प्रक्रिया उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद करेगी।
स्थानीय लोगों में उम्मीद की किरण
63 नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबर से स्थानीय ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। लंबे समय से हिंसा और भय के माहौल में जी रहे लोगों को अब शांति और विकास की संभावनाएं नजर आने लगी हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह नक्सली हिंसा छोड़ते रहे, तो क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी विकास कार्य तेजी से पूरे हो सकेंगे।
नक्सल विरोधी अभियान को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियानों को नई दिशा देगा। इससे न केवल संगठन की ताकत कमजोर होगी, बल्कि अन्य सक्रिय नक्सलियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
कुल मिलाकर, दंतेवाड़ा में हुआ यह आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।
डिस्क्लेमर
यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, प्रशासनिक बयानों और प्रारंभिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित सूचनाएं समय-समय पर बदल सकती हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी अंतिम निष्कर्ष या निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोतों और प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं की पुष्टि अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की त्रुटि या नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।













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