CG HC POSH कमेटी पर रिमार्क: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट को दी महत्वपूर्ण जानकारी

CG HC POSH कमेटी पर रिमार्क: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट को दी महत्वपूर्ण जानकारी

दिनांक: 9 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा

ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़ी POSH (Prevention of Sexual Harassment) कमेटी को लेकर अहम टिप्पणी की है। न्यायालय ने इस संबंध में को विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई है। यह मामला देशभर में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा होने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

POSH कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपने रिमार्क में स्पष्ट किया कि POSH अधिनियम के तहत गठित आंतरिक शिकायत समितियों (Internal Complaints Committee) का सक्रिय और प्रभावी होना अनिवार्य है। न्यायालय ने यह भी बताया कि राज्य के विभिन्न विभागों और संस्थानों में POSH कमेटियों के गठन और कार्यप्रणाली की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामला

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है, जहां देशभर में POSH कानून के पालन की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से यह जानकारी मांगी गई थी कि राज्य में कार्यस्थल यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं और POSH कमेटियां कितनी सक्रिय हैं।

महिला सुरक्षा को लेकर न्यायपालिका की सख्ती

उच्च न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी कार्यालय या संस्थान में POSH कमेटी का गठन नहीं किया गया है या वह निष्क्रिय पाई जाती है, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देना केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानूनी दायित्व भी है। न्यायालय ने इस दिशा में सख्त रुख अपनाने की बात कही है।

शिकायतों के त्वरित निपटारे की आवश्यकता

न्यायालय ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि POSH कमेटियों का उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा करना है। देरी या लापरवाही से पीड़ितों का मनोबल टूटता है और कानून का उद्देश्य कमजोर पड़ता है। इसलिए सभी संस्थानों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

प्रशासनिक विभागों को स्पष्ट संदेश

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के इस रिमार्क को राज्य के सभी सरकारी और निजी संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि कार्यस्थल यौन उत्पीड़न के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि POSH कानून का पूर्ण पालन हो।

महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट को दी गई यह जानकारी और रुख महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे न केवल शिकायत प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी, बल्कि कार्यस्थलों पर सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने में भी मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, POSH कमेटी को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह रिमार्क राज्य में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


डिस्क्लेमर

यह लेख न्यायालय से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स, सार्वजनिक सूचनाओं और प्रारंभिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। कानूनी मामलों में समय-समय पर परिस्थितियां और तथ्य बदल सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित न्यायालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों और सूचनाओं का अवलोकन अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की त्रुटि, नुकसान या गलत व्याख्या के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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