छत्तीसगढ़ में स्कूल‑कॉलेज अब ESI अधिनियम के दायरे में: हाईकोर्ट का अहम फैसला

छत्तीसगढ़ में स्कूल‑कॉलेज अब ESI अधिनियम के दायरे में: हाईकोर्ट का अहम फैसला

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में यह स्पष्ट किया है कि राज्य के सभी शिक्षण संस्थान अब Employees’ State Insurance (ESI) Act, 1948 के अंतर्गत आएंगे। यह फैसला उन निजी और अर्द्ध-सरकारी स्कूल‑कॉलेजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो अब तक इस अधिनियम के अंतर्गत आने से बचते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में स्कूल‑कॉलेज अब ESI अधिनियम के दायरे में: हाईकोर्ट का अहम फैसला

इस निर्णय के तहत अब शिक्षण संस्थानों को अपने कर्मचारियों को ESI की सुविधा देनी होगी, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएँ, बीमा सुरक्षा, और अन्य लाभ शामिल हैं। इससे हजारों शिक्षक, कर्मचारी और सहायक स्टाफ को सीधा लाभ मिलेगा।

पृष्ठभूमि

कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने ESI अधिनियम को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि वे एक “शैक्षणिक संस्था” हैं और उनका व्यवसायिक (commercial) उद्देश्य नहीं होता, इसीलिए यह अधिनियम उन पर लागू नहीं होना चाहिए।

हालाँकि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षण संस्थाएँ भी एक प्रकार का संगठित कार्यस्थल हैं और उनके कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा आवश्यक है। कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ESI अधिनियम का उद्देश्य सामाजिक न्याय है, न कि केवल व्यापारिक संस्थानों को कवर करना।

प्रभाव और लाभ

  • शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच मिलेगी।
  • ESI के अंतर्गत आने से कर्मचारियों को बीमारियों, दुर्घटना, और मातृत्व लाभ जैसी स्थितियों में आर्थिक सहायता मिलेगी।
  • संस्थानों को रजिस्ट्री, योगदान, और रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

हालांकि, इस फैसले से कुछ शिक्षण संस्थाओं पर वित्तीय दबाव अवश्य बढ़ेगा क्योंकि उन्हें अपने कर्मचारियों की ESI में आंशिक योगदान देना होगा। लेकिन यह निर्णय दीर्घकालिक रूप से कर्मचारियों के हित में है।

आगे की प्रक्रिया

राज्य के शिक्षा विभाग और श्रम विभाग को अब सभी स्कूल‑कॉलेजों में ESI लागू करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी करने होंगे। साथ ही, निजी संस्थाओं को नियमानुसार अपने कर्मचारियों का पंजीकरण ESI पोर्टल पर करना होगा।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह फैसला एक सकारात्मक कदम है जो शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा। यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि शिक्षा संस्थानों को भी अपने स्टाफ के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।


Sources: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय निर्णय, Times of India रिपोर्ट, श्रम मंत्रालय दस्तावेज

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और समाचार रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी क़ानूनी या प्रशासनिक निर्णय के लिए विशेषज्ञ या संबंधित विभाग से संपर्क करना अनिवार्य है। लेखक या प्रकाशक इस लेख की जानकारी के आधार पर की गई किसी भी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।

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