छत्तीसगढ़ में बारिश का असमान वितरण और खेती पर प्रभाव

छत्तीसगढ़ में बारिश का असमान वितरण और खेती पर प्रभाव

प्रकाशन तिथि: 15 सितंबर 2025

छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन अब तक का बारिश का पैटर्न बेहद असमान दिखाई दे रहा है। राज्य के कुछ जिलों जैसे बेमेतरा, जशपुर और कबीरधाम में वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जबकि बस्तर, सुकमा और नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। इस असमान बारिश ने राज्य के किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में बारिश का संतुलन नहीं बना, तो खरीफ फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। खासकर धान की फसल, जो राज्य की प्रमुख फसल है, पानी की कमी या अत्यधिक जलभराव दोनों से प्रभावित हो सकती है।

कहां कम और कहां ज़्यादा बारिश?

राज्य के उत्तर और मध्य जिलों में अब तक औसतन 25-35% कम वर्षा हुई है, जबकि दक्षिणी जिलों में सामान्य से 20% तक अधिक वर्षा दर्ज की गई है। बेमेतरा और जशपुर जैसे जिलों में सूखे जैसे हालात बनने की संभावना जताई गई है।

दूसरी ओर, बस्तर संभाग में अधिक बारिश के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे बीज सड़ने और फसलों को नुकसान होने का खतरा है।

प्रशासन और कृषि विभाग की तैयारी

राज्य कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में उचित जल निकासी की व्यवस्था करें और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक फसल योजना अपनाएँ। विभाग के अधिकारियों ने फसल बीमा, मृदा परीक्षण और कृषि सलाह शिविरों की संख्या बढ़ा दी है, ताकि किसानों को सही दिशा में मार्गदर्शन मिल सके।

इसके अलावा, मौसम विभाग ने आगामी 7 दिनों में कुछ जिलों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों को राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी भी आपात स्थिति के लिए प्रशासन ने अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।

किसानों की मांग और स्थिति

किसानों का कहना है कि उन्हें अभी तक सरकार की ओर से किसी प्रकार की राहत या सहायता नहीं मिली है। जिन इलाकों में फसलें नष्ट हो रही हैं, वहाँ जल्द मुआवजा देने की मांग की जा रही है। साथ ही, किसानों ने कृषि उपकरण, बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपील की है।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में बारिश का असमान वितरण किसानों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। जहां कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहीं अन्य जगहों पर अधिक वर्षा के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं। इस स्थिति में सरकार, कृषि विभाग और किसानों को मिलकर त्वरित और प्रभावी उपाय करने की आवश्यकता है, ताकि खाद्यान्न उत्पादन और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।

Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की आम राय पर आधारित है। कृपया कृषि निर्णय लेते समय अधिकृत विभागों से संपर्क करें।

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