प्रकाशन तिथि: 17 सितंबर 2025
परिचय
छत्तीसगढ़ राज्य जो वर्षों से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है, वहां 2025 में अब तक 133 नक्सलियों को विभिन्न अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ों में मार गिराया है। यह आंकड़ा नक्सल उन्मूलन की दिशा में राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त रणनीति की बड़ी सफलता को दर्शाता है।

नक्सल विरोधी अभियानों की स्थिति
राज्य के बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, कांकेर, राजनांदगांव और धमतरी जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में DRG (District Reserve Guard), CRPF (Central Reserve Police Force) एवं COBRA कमांडो द्वारा संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। ये सभी अभियान गुप्त सूचनाओं और ड्रोन सर्वेक्षण के आधार पर रणनीतिक रूप से संचालित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नक्सलियों के खिलाफ बढ़ते दबाव और सटीक ऑपरेशनों के चलते नक्सली कैडर अब कमजोर हो रहे हैं और आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है।
महत्वपूर्ण मुठभेड़ें
- मार्च 2025: बीजापुर जिले में एक बड़ी मुठभेड़ में 12 नक्सली ढेर हुए थे।
- मई 2025: सुकमा में सुरक्षा बलों ने 9 नक्सलियों को घेर कर मार गिराया।
- सितंबर 2025: धमतरी जिले के मुहकोट-आमझर जंगल में एक नक्सली मारा गया और SLR राइफल बरामद हुई।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार की “सुनियोजित आक्रामक नीति” और आधुनिक तकनीक का उपयोग सफल रहा है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विश्नुदेव साय ने बार-बार यह दोहराया है कि छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाल ही में उन्होंने कहा:
“हम नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को अंतिम पड़ाव तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सुरक्षाबलों की बहादुरी और समर्पण की बदौलत आज हम बड़ी कामयाबी की ओर बढ़ रहे हैं।”
इसके साथ ही राज्य में पुनर्वास और विकास योजनाओं को भी गति दी जा रही है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल हो सके।
जनता की भूमिका और जागरूकता
प्रशासन अब स्थानीय जनता को भी जागरूक करने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास कर रहा है। सुरक्षा बलों द्वारा स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र जैसे विकास कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
साथ ही, ‘मुखबिर योजना’ के तहत नक्सली गतिविधियों की सूचना देने वाले नागरिकों को गोपनीयता और पुरस्कार की गारंटी दी जाती है।
निष्कर्ष
2025 में अब तक छत्तीसगढ़ में 133 नक्सलियों का मारा जाना यह संकेत देता है कि नक्सल समस्या पर नियंत्रण की दिशा में यह एक निर्णायक वर्ष हो सकता है। राज्य सरकार और सुरक्षा बलों की सामूहिक कार्रवाई और समर्पण इस दिशा में बड़ी उपलब्धि साबित हो रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों, सरकारी विज्ञप्तियों एवं मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। आंकड़ों या घटनाओं में समय के साथ बदलाव संभव है। पाठकों से अनुरोध है कि वे आधिकारिक सूत्रों (जैसे राज्य सरकार या पुलिस विभाग की वेबसाइट) पर सत्यापन अवश्य करें। किसी त्रुटि या संशोधन की स्थिति में लेखक या वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होंगे।













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