प्रकाशन तिथि: 18 सितंबर 2025 | स्थान: भिलाई, छत्तीसगढ़
क्या है मामला?
भिलाई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले की जांच के तहत छापेमारी की है। यह छापा 140 करोड़ रुपये के कथित “कस्टम मिलिंग घोटाले” से जुड़ा हुआ है, जिसमें चावल मिल मालिकों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है।

कस्टम मिलिंग घोटाला क्या है?
कस्टम मिलिंग योजना के तहत राज्य सरकार किसानों से धान खरीदकर उसे चावल में तब्दील करने के लिए निजी राइस मिलों को देती है। इस प्रक्रिया में मिल मालिकों को सरकारी नियमों के तहत एक निश्चित समय सीमा में चावल लौटाना होता है। लेकिन मिल मालिकों पर आरोप है कि उन्होंने धान की मिलिंग नहीं की, फिर भी सरकार से भुगतान ले लिया गया।
ईडी की कार्रवाई
इसी मामले में ईडी ने भिलाई के कई ठिकानों पर छापा मारा। छापेमारी में बैंक दस्तावेज, फर्जी बिल, लेन-देन की रसीदें और डिजिटल डाटा जब्त किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला पिछले कुछ वर्षों से चल रहा था और इसमें कई रसूखदार नाम भी सामने आ सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में भी खलबली मच गई है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
जनता में प्रतिक्रिया
आम जनता के बीच इस खबर को लेकर चिंता और नाराज़गी देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि अगर सरकारी योजनाओं का इस तरह दुरुपयोग होता रहेगा, तो इसका सीधा असर किसानों और गरीबों पर पड़ेगा।
आगे की कार्रवाई
ED ने कहा है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आगे और छापे मारे जा सकते हैं। जिन लोगों के नाम दस्तावेजों में सामने आए हैं, उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा जाएगा।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत जानकारी की पुष्टि हेतु पाठकों को संबंधित आधिकारिक एजेंसियों से सत्यापन करने की सलाह दी जाती है। यह वेबसाइट किसी भी कानूनी या तथ्यात्मक दावे की जिम्मेदारी नहीं लेती है।












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