छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है दिव्यांगों के नाम पर हुआ कथित ₹1000 करोड़ का घोटाला। यह मामला उन योजनाओं से जुड़ा है, जो दिव्यांग जनों के हित और कल्याण के लिए चलाई जा रही थीं। आरोप है कि इन योजनाओं के तहत मिलने वाले फंड में भारी हेराफेरी हुई और करोड़ों रुपये की राशि गलत तरीके से खर्च की गई।

घोटाले की पृष्ठभूमि
राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत दिव्यांगों के पुनर्वास, शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार के लिए बड़ी रकम केंद्र और राज्य से मिलती रही है। लेकिन जांच में पाया गया कि इन फंड्स का सही तरीके से उपयोग नहीं हुआ। कई मामलों में फर्जी लाभार्थियों के नाम जोड़े गए, जबकि असल दिव्यांगजन तक सहायता नहीं पहुंची।
पूर्व मंत्री और आईएएस अधिकारी पर आरोप
इस पूरे मामले में एक पूर्व मंत्री और एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि इनके संरक्षण और मिलीभगत से यह हेराफेरी संभव हुई। फिलहाल, जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों और लेन-देन की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेस ने इस घोटाले को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि दिव्यांगों के नाम पर हुई यह हेराफेरी न केवल आर्थिक अपराध है बल्कि यह संवेदनहीनता का उदाहरण भी है। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
जनता की नाराज़गी
सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक जनता इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जता रही है। लोगों का कहना है कि दिव्यांगों की योजनाओं के लिए जो पैसा आवंटित किया गया था, वह सीधे-सीधे उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए होना चाहिए था, लेकिन भ्रष्टाचारियों ने इसे अपनी जेबें भरने का जरिया बना लिया।
आगे की कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मामले में सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रही है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो बड़े स्तर पर गिरफ्तारी और कार्रवाई संभव है। साथ ही, दिव्यांग योजनाओं की पारदर्शिता और मॉनिटरिंग को और मजबूत बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
यह मामला केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक सबक है कि संवेदनशील वर्गों के लिए बनी योजनाओं में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कड़े कानून और ठोस निगरानी व्यवस्था जरूरी है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करते। पाठकों से आग्रह है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक घोषणाओं और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें।













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