100 साल पुरानी दुकान से मंदिरों तक GST राहत की मांग — कुरूद के व्यापारियों की आवाज़

कुरूद, धमतरी —


कुरूद के व्यापारिक समुदाय ने स्थानीय प्रशासन व केन्द्र सरकार से पुरानी दुकानों और छोटे मंदिरों पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) में छूट या आसान रिलीफ पैकेज की मांग जोरशोर से उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि कुछ दुकानें एक सदी से अधिक पुरानी हैं और वे सांस्कृतिक—ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए इन पर कर के वर्तमान ढांचे को लागू करना उनकी आर्थिक समस्याओं को बढ़ा रहा है।

कारण और व्यापारियों के तर्क

व्यापारियों ने बताया कि पुराने मालिकों वाली दुकानें सीमित आय पर चलती हैं और इनका संचालन पारिवारिक ढांचे पर निर्भर है। बढ़ती इनपुट लागत, कम ग्राहक प्रवाह और अनुपालन से जुड़ी जटिलताएँ इनके लिए भारी बोझ बन रही हैं। व्यापारी प्रतिनिधि ने कहा कि छोटे मंदिर और लोक-धार्मिक स्थल भी समान कारणों से नुकसान उठा रहे हैं—इनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं कि वे जीएसटी के बोझ को बर्दाश्त कर सकें।

स्थानीय प्रभाव

नागरिकों और स्थानीय पर्यटकों के लिए ये पुरानी दुकानें और मंदिर सिर्फ व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। व्यापारियों के अनुसार अगर ऐसे प्रतिष्ठानों को छूट दी जाए तो इससे न केवल उनको राहत मिलेगी बल्कि स्थानीय पर्यटन और पारंपरिक हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलेगा।

मांगें और प्रस्तावित समाधान

प्रदर्शित प्रस्तावों में शामिल है — (1) 100 साल से अधिक पुरानी दुकानों के लिए विशेष कर-छूट या प्रतिस्थापन श्रेणी, (2) छोटे मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों के लिए GST-रीलिफ या रिफंड प्रक्रिया का सरलीकरण, (3) स्थानीय स्तर पर कर रियायतों के लिए एक सर्वे व सत्यापन तंत्र, और (4) प्रशिक्षण व ऑनलाइन पंजीकरण में मदद ताकि छोटे व्यापार डिजिटल अनुपालन कर सकें।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि व्यापारिक मांगों पर विचार किया जाएगा और नियमों में संभावित बदलाव के लिए वे राज्य व केन्द्र के संबंधित विभागों से संपर्क करेंगे। अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि किसी भी तरह के कर छूट निर्णय के लिये उचित सत्यापन और आर्थिक प्रभाव का आकलन आवश्यक है।

कुरूद की यह चर्चा स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच तालमेल की जरूरत को दर्शाती है। यदि प्रशासन और नीति-निर्माता व्यापारियों की चिंताओं का संतुलित समाधान निकालते हैं, तो इससे न केवल परंपराएँ बचेंगी बल्कि छोटे व्यवसायों की आर्थिक वृद्धि की राह भी खुल सकती है।


डिस्क्लेमर: यह लेख स्थानीय रिपोर्ट्स और व्यापारियों के बयानों पर आधारित सांकेतिक जानकारी देता है। इसमें दी गई जानकारी को किसी भी कानूनी, कर या वित्तीय सलाह के रूप में न लिया जाए। यदि आप कर छूट या व्यापारिक नियमों के बारे में आधिकारिक जानकारी चाहते हैं तो कृपया संबंधित सरकारी विभाग या प्रमाणित कर सलाहकार से संपर्क करें। लेख में उपयोग की गई तारीखें व घटनाएँ स्थानीय रिपोर्टिंग के अनुसार दर्शायी गई हैं — सत्यापन हेतु स्थानीय समाचार स्रोत देखें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *