प्रकाशित: 18 अक्टूबर 2025 | लेखक: Ajay verma
आज की तिथि और दिन
आज कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष द्वादशी तिथि है। दिन शनिवार और विक्रम संवत 2082 के अनुसार 18 अक्टूबर 2025 है। द्वादशी तिथि का आरंभ 17 अक्टूबर की शाम को हुआ था और इसका समापन 18 अक्टूबर की देर शाम तक रहेगा। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है, विशेषकर भगवान विष्णु की उपासना के लिए।

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय: प्रातः 06:20 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:45 बजे
सूर्यास्त के बाद संध्या पूजन, दीपदान और भगवान विष्णु की आराधना शुभ मानी जाती है।
आज का नक्षत्र और योग
आज का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद है, जो सुबह 10:10 तक रहेगा, उसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा। आज का योग शुभ योग है, जो पूरे दिन शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है।
राहुकाल और शुभ मुहूर्त
आज का राहुकाल प्रातः 9:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा। इस समय में कोई भी शुभ कार्य जैसे यात्रा प्रारंभ करना, नई खरीदारी या पूजा का आरंभ करना उचित नहीं माना जाता। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:45 बजे तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत मंगल समय है।
चंद्र और ग्रह स्थिति
आज चंद्रमा कुम्भ राशि में गोचर कर रहा है, जो ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक चिंतन को बढ़ाने वाला समय है। सूर्य तुला राशि
धार्मिक महत्त्व
द्वादशी तिथि को हरि-वासर कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। व्रत, दान और तुलसी की आराधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन “एकादशी पारण” भी करते हैं।
निष्कर्ष
18 अक्टूबर 2025 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से संतुलित है। जहाँ एक ओर शुभ योग और द्वादशी तिथि इसे पुण्यदायी बनाते हैं, वहीं राहुकाल का समय सावधानी से टालने योग्य है। उचित समय का ध्यान रखकर कार्य करने से सफलता और शांति दोनों प्राप्त हो सकती हैं।
डिस्कलेमर
यह लेख सामान्य पंचांग और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। स्थान-भेद के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से परामर्श लें। यह सामग्री केवल सामान्य सूचना हेतु है।











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