प्रकाशित: 24 अक्टूबर 2025 | लेखक: Ajay Verma | स्रोत: कृषि विज्ञान केंद्र, अंबिकापुर
कृषि विज्ञान केंद्र में ज्ञान और नवाचार का संगम
अंबिकापुर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में आयोजित एक दिवसीय किसान मेले में सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। इस मेले का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों, फसल-विविधीकरण, और मत्स्य पालन जैसी आयवर्धक गतिविधियों के प्रति जागरूक करना था। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि जैविक खेती न केवल भूमि की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार मूल्य को भी सुधारती है।
जैविक खेती पर विशेष सत्र
कार्यक्रम के पहले सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने जैविक खेती की विधियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की संरचना प्रभावित होती है, इसलिए किसानों को गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का उपयोग बढ़ाने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि जैविक खेती से दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होते हैं और इससे पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आती है।
फसल-विविधीकरण से आय में वृद्धि
दूसरे सत्र में किसानों को फसल-विविधीकरण के महत्व के बारे में बताया गया। कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि एक ही फसल पर निर्भर रहने की बजाय किसानों को मौसम और मिट्टी के अनुसार विभिन्न फसलों की खेती करनी चाहिए। इससे न केवल जोखिम कम होता है, बल्कि किसानों की सालभर आय सुनिश्चित होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दलहन, तिलहन और सब्ज़ियों की मिश्रित खेती से उत्पादन लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।
मत्स्य पालन: ग्रामीण आजीविका का नया आयाम
कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों ने मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकें प्रदर्शित कीं। उन्होंने बताया कि तालाबों में वैज्ञानिक ढंग से मछली पालन करने से किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। मेले में उपस्थित किसानों को मत्स्य बीज उत्पादन, तालाब प्रबंधन और आहार की गुणवत्ता पर भी प्रशिक्षण दिया गया। यह पहल विशेष रूप से उन किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी जिनके पास सीमित कृषि भूमि है।
किसानों की सहभागिता और अनुभव साझा करना
मेले में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और नए प्रयोगों के बारे में भी चर्चा की। कई किसानों ने बताया कि जैविक खेती अपनाने के बाद उनकी भूमि की उत्पादकता बढ़ी है और उत्पादन की लागत में कमी आई है। कार्यक्रम में महिला किसानों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और घरेलू स्तर पर खाद निर्माण एवं सब्ज़ी उत्पादन के मॉडल प्रस्तुत किए।
सरकारी योजनाओं की जानकारी और सहायता केंद्र
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मत्स्य विकास योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी योजनाओं की जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि ये योजनाएँ छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मददगार साबित हो रही हैं।
डिस्क्लेमर
यह लेख अंबिकापुर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित किसान मेले से प्राप्त जानकारी और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। आयोजन के कुछ विवरण समय या परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी आधिकारिक जानकारी या प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने से पहले संबंधित विभाग से पुष्टि अवश्य करें। इस लेख का उद्देश्य केवल जनजागरूकता बढ़ाना है।











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