तारीख: 4 जनवरी 2026
लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल से एक बड़ी और निर्णायक खबर सामने आई है। क्षेत्र के एक वरिष्ठ नक्सली नेता बरसे देव ने अपने लगभग 40 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण नक्सल संगठन पीएलजीए (People’s Liberation Guerrilla Army) की एक प्रमुख यूनिट के लगभग समाप्त होने का संकेत है। इसे नक्सल युग के अंत की ओर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

वरिष्ठ नक्सली बरसे देव का आत्मसमर्पण
बरसे देव लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था और संगठन के भीतर उसकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। उसके साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में कई ऐसे सदस्य भी शामिल हैं, जो वर्षों से जंगलों में रहकर हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों की बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
PLGA यूनिट के कमजोर होने के संकेत
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, बरसे देव जिस यूनिट का हिस्सा था, वह पीएलजीए की एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती थी। इस यूनिट के निष्क्रिय होने से नक्सल संगठन की परिचालन क्षमता को गहरा झटका लगा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों में भारी कमी आने की संभावना है।
लगातार दबाव और सफल अभियान
पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ पुलिस, डीआरजी और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के कारण नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है और उन्हें सुरक्षित ठिकाने छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने भी पूछताछ में लगातार ऑपरेशनों और संसाधनों की कमी को आत्मसमर्पण का प्रमुख कारण बताया है।
आत्मसमर्पण नीति की अहम भूमिका
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति भी इस सफलता में अहम मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने, रोजगार, आवास और सुरक्षा देने का भरोसा दिया गया है। इससे नक्सलियों के बीच यह संदेश गया है कि हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का विकल्प मौजूद है।
बस्तर में शांति की उम्मीद
इस बड़े आत्मसमर्पण के बाद बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीद और मजबूत हुई है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि नक्सलियों के कमजोर होने से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। आम नागरिकों में भी सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ा है।
कुल मिलाकर, बरसे देव और उसके साथियों का आत्मसमर्पण नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले समय में बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने का सपना साकार हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, सुरक्षा एजेंसियों के बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। नक्सलवाद से संबंधित घटनाक्रम समय के साथ बदल सकते हैं। सटीक और आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभागों और अधिकृत स्रोतों से पुष्टि करना आवश्यक है।













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