बस्तर पंडुम 2026 का लोगो/थीम गीत जारी: जनजातीय कला-संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रयास

बस्तर पंडुम 2026 का लोगो/थीम गीत जारी: जनजातीय कला-संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रयास

दिनांक: 5 जनवरी 2026
लेखक: Ajay Verma

छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने के लिए बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत जारी किया गया है। यह पहल राज्य की आदिवासी कला और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रयास है। पंडुम समारोह केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और कला को दुनिया के सामने लाने का एक मंच भी है।

लोगो और थीम गीत का महत्व

बस्तर पंडुम 2026 के लोगो और थीम गीत को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह आदिवासी संस्कृति की पहचान और पारंपरिक कलाओं का प्रतिनिधित्व करे। लोगो में स्थानीय शिल्पकला, नृत्य और पारंपरिक प्रतीकों को शामिल किया गया है, जबकि थीम गीत में जनजातीय संगीत, लोकगीत और पारंपरिक रिदम का मिश्रण किया गया है। इससे आयोजकों का उद्देश्य है कि पंडुम का संदेश हर स्तर पर पहुंचे और जनता के बीच उत्साह बढ़े।

सांस्कृतिक प्रभाव

थीम गीत और लोगो के माध्यम से पंडुम समारोह में भाग लेने वाले लोग स्थानीय कला और संगीत से जुड़ेंगे। यह आदिवासी युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में मदद करेगा। साथ ही, राज्य के बाहर के दर्शक भी इस अवसर पर बस्तर की कला, लोकनृत्य और शिल्पकला का अनुभव कर पाएंगे।

आयोजन की तैयारी

बस्तर पंडुम 2026 के आयोजक पहले से ही सभी तैयारियों में जुटे हैं। स्थानीय कलाकारों को मंच पर प्रस्तुत करने के लिए प्रशिक्षण और अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही, दर्शकों और पर्यटकों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। लोगो और थीम गीत का लॉन्च इस तैयारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर पंडुम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना जाए। इस पहल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा। साथ ही, यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित करने का माध्यम भी बनेगा।

भविष्य की दिशा

आयोजन में लोगो और थीम गीत की लॉन्चिंग के बाद, आयोजकों का ध्यान पंडुम 2026 में विभिन्न कार्यक्रमों, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर केंद्रित है। इससे राज्य में जनजातीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार को और बल मिलेगा और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल आदिवासी कला और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में एक महत्वपूर्ण कदम है।


Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक समाचार स्रोतों और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित जानकारी पर तैयार किया गया है। लेखक और प्रकाशक किसी भी अप्रत्याशित बदलाव या त्रुटियों के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। पाठकों से अनुरोध है कि पंडुम समारोह या संबंधित जानकारी के लिए केवल आधिकारिक आयोजकों या सरकारी वेबसाइट का संदर्भ लें।

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