बस्तर पंडुम 2026 का समापन — संस्कृति व विकास पर जोर

बस्तर पंडुम 2026 का समापन — संस्कृति व विकास पर जोर

दिनांक: 11 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा

जगदलपुर, छत्तीसगढ़: बस्तर पंडुम 2026 का भव्य समापन उत्साह, परंपरा और विकास के संदेश के साथ हुआ। इस महोत्सव में 55,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, लोककला, पारंपरिक नृत्य एवं हस्तशिल्प की अनूठी झलक देखने को मिली। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और रोजगार सृजन की संभावनाओं को भी नई दिशा देने वाला साबित हुआ।

आदिवासी संस्कृति का भव्य प्रदर्शन

समापन समारोह में विभिन्न जनजातीय समुदायों द्वारा पारंपरिक नृत्य और संगीत प्रस्तुत किए गए। रंग-बिरंगे परिधानों, लोक वाद्ययंत्रों और पारंपरिक रीति-रिवाजों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बस्तर की विशिष्ट धातु कला, टेराकोटा शिल्प और हस्तनिर्मित वस्त्रों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इससे स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच मिला।

पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल

कार्यक्रम के दौरान बस्तर क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। प्राकृतिक सौंदर्य, झरने, घने वन और ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की रणनीति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, सड़क और आवास सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा स्थानीय युवाओं को गाइड और आतिथ्य सेवाओं में प्रशिक्षित करने की योजना है।

रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण

बस्तर पंडुम 2026 का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना भी रहा। स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी। कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार हस्तशिल्प, वन उत्पाद और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं लागू करेगी, जिससे क्षेत्र में स्थायी आय के स्रोत विकसित हो सकें।

सामाजिक एकता और परंपरा का संरक्षण

इस आयोजन ने सामाजिक एकता का संदेश भी दिया। विभिन्न जनजातीय समुदायों की भागीदारी ने यह दर्शाया कि सांस्कृतिक विविधता ही बस्तर की असली पहचान है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है, जिससे सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण संभव होता है।

समापन समारोह में उपस्थित अतिथियों ने बस्तर की सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह महोत्सव आने वाले वर्षों में और भी बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। कुल मिलाकर, बस्तर पंडुम 2026 ने संस्कृति और विकास के संतुलन का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आने वाले समय में क्षेत्र की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।


Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी आधिकारिक घोषणा, योजना या निर्णय की पुष्टि के लिए संबंधित सरकारी विभाग या आधिकारिक स्रोत से सत्यापन करना आवश्यक है।

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