छत्तीसगढ़ की संस्कृति चमकी ‘भारत पर्व 2026’ में, लोक कला, पर्यटन व व्यंजन प्रमुख आकर्षण रहे

छत्तीसगढ़ की संस्कृति चमकी ‘भारत पर्व 2026’ में, लोक कला, पर्यटन व व्यंजन प्रमुख आकर्षण रहे

दिनांक: 31 जनवरी 2026
लेखक: Ajay Verma

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित भारत पर्व 2026 में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने देशभर से आए पर्यटकों और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस राष्ट्रीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक कला, पारंपरिक नृत्य, हस्तशिल्प, पर्यटन संभावनाएं और पारंपरिक व्यंजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।

भारत पर्व का उद्देश्य देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और पर्यटन स्थलों को एक मंच पर प्रस्तुत करना है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ पवेलियन ने राज्य की विशिष्ट पहचान को प्रभावी ढंग से दर्शाया।

लोक कला और नृत्य ने मोहा मन

छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलक लोक नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से देखने को मिली। पंथी नृत्य, राउत नाचा और करमा जैसे पारंपरिक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदर की थाप और जीवंत प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत कर दिया।

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और बड़ी संख्या में लोग छत्तीसगढ़ पवेलियन की ओर आकर्षित हुए।

पर्यटन पवेलियन बना आकर्षण का केंद्र

छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग द्वारा लगाए गए पवेलियन में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी प्रदर्शित की गई। चित्रों, वीडियो और मॉडल्स के माध्यम से चित्रकोट जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर की जनजातीय संस्कृति और धार्मिक स्थलों की जानकारी दी गई।

पर्यटन अधिकारियों ने बताया कि भारत पर्व जैसे आयोजनों से राज्य की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है, जिससे भविष्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।

पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू

छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने भी भारत पर्व 2026 में खास पहचान बनाई। ठेठरी, खुरमी, चीला, फरा और बोरे-बासी जैसे पारंपरिक व्यंजनों को चखने के लिए लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। आगंतुकों ने इन व्यंजनों के स्वाद और सादगी की जमकर प्रशंसा की।

खान-पान स्टॉल्स के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जीवनशैली और खाद्य परंपरा को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया।

राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की सशक्त प्रस्तुति

भारत पर्व 2026 में छत्तीसगढ़ की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सांस्कृतिक, पर्यटन और लोक कलाओं के क्षेत्र में समृद्ध विरासत रखता है। इस आयोजन से न केवल कलाकारों को पहचान मिली, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक छवि भी और मजबूत हुई।

आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के राष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।


Disclaimer:
यह लेख भारत पर्व 2026 से संबंधित उपलब्ध जानकारी एवं सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। कार्यक्रम, प्रस्तुतियों एवं विवरणों में आयोजन समिति द्वारा समय-समय पर परिवर्तन संभव है।

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