दिनांक: 29 दिसंबर 2025
लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों की हड़ताल लगातार जारी है। राज्यभर में लगभग 4.50 लाख से अधिक कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की दैनिक सेवाओं पर पड़ रहा है। हड़ताल के चलते राज्य सरकार ने 31 दिसंबर तक कई सरकारी दफ्तरों और स्कूलों के बंद रहने की स्थिति स्पष्ट की है।

हड़ताल का मुख्य कारण क्या है?
कर्मचारी संगठनों के अनुसार यह हड़ताल लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर की जा रही है। इन मांगों में वेतन विसंगति दूर करना, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार से कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
सरकारी कामकाज पर पड़ा असर
हड़ताल के कारण सचिवालय, कलेक्ट्रेट, तहसील कार्यालय, नगर निगम, पंचायत कार्यालय और अन्य शासकीय संस्थानों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड, और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूल और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित
हड़ताल का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण पठन-पाठन कार्य ठप पड़ा है। सरकार द्वारा 31 दिसंबर तक स्कूल बंद रखने के निर्णय से छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं, खासतौर पर उन छात्रों के लिए जिनकी परीक्षाएं नजदीक हैं।
कर्मचारी संगठनों का रुख
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। राज्य के विभिन्न जिलों में रैलियां, धरना-प्रदर्शन और सभाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी भाग ले रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया है कि कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। कुछ आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से अलग रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों। हालांकि अब तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में जारी यह कर्मचारी–अधिकारी हड़ताल राज्य प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। अब सबकी नजरें सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
Disclaimer:
यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। यह सामग्री केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। लेखक या वेबसाइट किसी भी प्रकार के प्रशासनिक, कानूनी या व्यक्तिगत निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं होगी। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सरकारी और आधिकारिक सूचनाओं की पुष्टि अवश्य करें।













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