छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य के पूर्व IAS अधिकारी अनिल तुतेजा और प्रसिद्ध व्यवसायी अनवर ढेबर के खिलाफ 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला कस्टम मिलिंग घोटाले से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने चावल मिलर्स से बिल क्लियरेंस और अन्य प्रक्रियाओं में अवैध रूप से हस्तक्षेप करते हुए भारी रिश्वत वसूली। इस दौरान उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और कई फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए धन को इधर-उधर ट्रांसफर किया। जांच में कई बैंक खातों, मोबाइल चैट्स और फर्मों के रिकॉर्ड को जब्त किया गया है, जो कथित घोटाले से जुड़े बताए जा रहे हैं।
EOW की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि तुतेजा और ढेबर ने मिलर्स पर दबाव डालकर बिल पास करवाने के नाम पर अवैध वसूली की। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इस कस्टम मिलिंग घोटाले के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, आरोपियों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकारते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया है।
चार्जशीट में दर्ज गवाहों और सबूतों की सूची
सूत्रों के मुताबिक, 1,500 पन्नों की चार्जशीट में लगभग दो दर्जन गवाहों के बयान शामिल हैं। इनमें सरकारी अधिकारी, मिलर्स और कुछ अन्य व्यवसायी भी हैं जिन्होंने जांच एजेंसी को अहम जानकारी दी। इन सबूतों में वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेज़, बैंक ट्रांज़ेक्शन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह चार्जशीट भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा है। अदालत में जल्द ही इस मामले की सुनवाई शुरू होगी, जहाँ आगे की कार्रवाई तय होगी। राज्य सरकार ने साफ संकेत दिया है कि इस तरह के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
इस मामले के उजागर होने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है, वहीं सत्तापक्ष ने कहा है कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी। यह मामला न केवल प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल उठाता है बल्कि राज्य में पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम भी माना जा रहा है।
निष्कर्ष: कस्टम मिलिंग घोटाला छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा सबक है। EOW द्वारा दाखिल यह चार्जशीट सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति को मजबूत करती है। आने वाले दिनों में इस केस से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और सरकारी रिपोर्टों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार को साझा करना है, किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को प्रभावित करना नहीं। पाठकों से आग्रह है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।













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