छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सख्त: बिलासपुर में गायों की मौत पर सरकार से जवाब तलब

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सख्त: बिलासपुर में गायों की मौत पर सरकार से जवाब तलब

बिलासपुर, 31 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बेल्टारा और सुकुलकारी गांवों में दर्जनों गायों की संदिग्ध मौतों के बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों की शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को जवाबदेही के कटघरे में खड़ा किया है। न्यायालय ने इस घटना को “मानव संवेदनशीलता पर हमला” करार देते हुए तत्काल जांच रिपोर्ट मांगी है।

घटना का विवरण

मिली जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में बीते कुछ दिनों से मवेशियों की लगातार मौत हो रही थी। ग्रामीणों ने बताया कि बेल्टारा और सुकुलकारी गांवों में दर्जनों गायें बेजान हालत में पाई गईं। मृत गायों के शरीर पर चोट और संक्रमण के निशान भी पाए गए हैं। कई ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि मवेशियों को लंबे समय से न तो पर्याप्त चारा मिल रहा था और न ही पशु चिकित्सकीय सहायता।

हाई कोर्ट की टिप्पणी और कार्रवाई

बिलासपुर हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति सीमा वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि “जानवरों के प्रति यह लापरवाही केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि मानवीय असंवेदनशीलता का प्रतीक है।” कोर्ट ने राज्य के पशुपालन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन से 10 नवंबर 2025 तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं।

स्थानीय प्रशासन की सफाई

जिला प्रशासन ने कहा कि प्राथमिक जांच के आधार पर मवेशियों की मौतों का कारण संक्रमण और पानी की कमी बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मृत गायों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट कारण सामने आएगा। इस बीच, क्षेत्र में सफाई और चिकित्सा टीमों को भेजा गया है ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और सामाजिक चिंता

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरी नाराज़गी है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद पशु चिकित्सा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। पशुप्रेमी संगठनों और गौ-सेवा समितियों ने इस घटना को “सरकारी लापरवाही का परिणाम” बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

भविष्य की दिशा और न्यायिक उम्मीद

हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार उचित देखभाल और निगरानी सुनिश्चित नहीं करती है, तो यह “संविधान में निहित करुणा के सिद्धांतों का उल्लंघन” माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि राज्य का दायित्व है कि वह न केवल मनुष्यों बल्कि जानवरों के जीवन की भी रक्षा करे। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में आने वाले दिनों में राज्य सरकार ठोस सुधारात्मक कदम उठाएगी।

लेखक: अजय वर्मा
प्रकाशन तिथि: 31 अक्टूबर 2025


डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और न्यायालयीन कार्यवाही के आधार पर तैयार की गई है। हमारा उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जानकारी पाठकों तक पहुँचाना है। किसी भी कानूनी या प्रशासनिक निर्णय के लिए संबंधित आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि आवश्यक है।

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