छत्तीसगढ़, जो भारत के धान उत्पादक प्रमुख राज्यों में से एक है, ने इस खरीफ सीज़न में धान की सरकारी खरीदी प्रक्रिया को लेकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, सरकार द्वारा तय किए गए कुल लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सका है, लेकिन फिर भी राज्य ने अब तक की सबसे अधिक धान खरीदी कर किसानों को राहत प्रदान की है।

लक्ष्य और वास्तविकता
राज्य सरकार ने इस वर्ष लगभग 110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा था। लेकिन विभिन्न कारणों – जैसे मौसम में असमय बदलाव, कुछ क्षेत्रों में फसल क्षति, और भू-स्वामित्व से संबंधित समस्याओं – के चलते यह लक्ष्य पूरी तरह से नहीं पाया गया।
फिर भी, 105 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी की गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक रिकॉर्ड है। यह राज्य सरकार की नीतियों और किसानों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा रहा है।
किसानों को हुआ लाभ
धान की खरीदी के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया था, जिसे समय पर भुगतान के साथ किसानों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इससे किसानों को बिचौलियों से छुटकारा मिला और उन्हें उनकी फसल की उचित कीमत भी मिली।
कई जिलों जैसे राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर और महासमुंद में किसानों ने खरीदी केंद्रों की सुविधाओं और व्यवस्था को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
सुधार की आवश्यकता
हालांकि सरकार की इस पहल की सराहना हो रही है, फिर भी कुछ क्षेत्रों में खरीदी केन्द्रों पर भीड़, स्लो प्रोसेसिंग, और ट्रांसपोर्टेशन जैसी चुनौतियाँ सामने आई हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की और सुझाव मांगे हैं।
आने वाले वर्षों में, इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और किसान‑हितैषी बनाने के लिए तकनीकी माध्यमों जैसे डिजिटल पंजीकरण, रीयल‑टाइम ट्रैकिंग और SMS अलर्ट सिस्टम पर भी विचार किया जा रहा है।
निष्कर्ष
धान की खरीदी में लक्ष्य से पीछे रहना एक चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन राज्य सरकार ने जो रिकॉर्ड खरीद दर्ज की है वह किसानों के विश्वास को मज़बूती देती है। भविष्य में अधिक संगठित और टिकाऊ कृषि-प्रणालियों के साथ यह प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो सकती है।
Sources: राज्य कृषि विभाग रिपोर्ट, मीडिया रिपोर्ट्स (Business Standard, TOI)
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कृपया किसी भी कृषि या वित्तीय निर्णय से पहले स्थानीय कृषि कार्यालय या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। लेखक या प्रकाशक इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर की गई क्रिया के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।














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