छत्तीसगढ़ में कई स्कूल आज बंद, छात्र संख्या कम होने पर लिया गया फैसला

छत्तीसगढ़ में कई स्कूल आज बंद, छात्र संख्या कम होने पर लिया गया फैसला

दिनांक: 16 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। राज्य के विभिन्न जिलों में छात्रों की संख्या लगातार कम होने के कारण कई सरकारी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया था, जिसके बाद स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस फैसले का असर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों सभी पर पड़ने वाला है।

छात्र संख्या में लगातार गिरावट

शिक्षा विभाग के अनुसार, कुछ प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में लंबे समय से नामांकन बहुत कम दर्ज किया जा रहा है। कई स्कूलों में छात्रों की संख्या इतनी कम है कि वहां नियमित कक्षाएं संचालित करना व्यावहारिक नहीं रह गया था। इसी कारण डीईओ स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं और रिपोर्ट तैयार कर डीपीआई को भेजी गई।

डीईओ द्वारा डीपीआई को भेजा गया प्रस्ताव

जिला शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में संचालित स्कूलों की स्थिति का आकलन कर यह प्रस्ताव रखा कि अत्यंत कम नामांकन वाले स्कूलों को समीपवर्ती स्कूलों में मर्ज किया जाए या बंद किया जाए। डीपीआई को भेजे गए पत्र में भवन, शिक्षक संख्या और छात्रों की उपस्थिति से संबंधित पूरी जानकारी शामिल की गई थी।

किन स्कूलों पर पड़ेगा असर

इस निर्णय का प्रभाव मुख्य रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों पर पड़ रहा है, जहां पलायन और निजी स्कूलों की ओर रुझान के कारण सरकारी स्कूलों में छात्र कम हो गए हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि जिन स्कूलों को बंद किया जा रहा है, वहां के छात्रों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया

स्कूल बंद करने के फैसले को लेकर अभिभावकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि यदि नजदीकी स्कूल में बेहतर सुविधाएं मिलती हैं, तो यह कदम सही है। वहीं कई लोग चिंता जता रहे हैं कि बच्चों को दूर जाना पड़ेगा, जिससे पढ़ाई में बाधा आ सकती है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें भी स्थानांतरण और समायोजन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है।

शिक्षा विभाग का पक्ष

शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है। कम छात्रों वाले स्कूलों में संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा था। स्कूलों के एकीकरण से बेहतर शैक्षणिक वातावरण, पर्याप्त शिक्षक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई बाधित न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा।

भविष्य की योजना

राज्य सरकार आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नामांकन बढ़ाने, स्कूलों में सुविधाएं सुधारने और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से सरकारी स्कूलों में छात्रों का भरोसा फिर से बढ़ेगा।


डिस्क्लेमर: यह लेख शिक्षा विभाग से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। स्कूलों की बंदी या एकीकरण से संबंधित अंतिम निर्णय जिला एवं राज्य स्तर पर जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार ही मान्य होंगे। पाठकों से अनुरोध है कि अपने क्षेत्र से संबंधित जानकारी के लिए संबंधित शिक्षा कार्यालय से संपर्क करें।

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