छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का आरोप, जांच IG रैंक अधिकारी को सौंपी गई

प्रकाशित: 24 अक्टूबर 2025 | लेखक: Ajay Verma | स्रोत: पुलिस मुख्यालय, रायपुर

वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब महिला कर्मी ने उच्चाधिकारियों से इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने तुरंत जांच के आदेश जारी किए हैं।

IG रैंक अधिकारी को सौंपी गई जांच

राज्य पुलिस विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे एक IG रैंक के अधिकारी को सौंपा है। उन्हें संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा करने, बयान दर्ज करने और निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच प्रक्रिया गोपनीय रूप से और पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।

महिला अधिकारी की शिकायत पर कार्रवाई

शिकायतकर्ता महिला कर्मी ने अपने बयान में कहा कि वरिष्ठ अधिकारी ने कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार किया और कई बार आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं। शिकायत दर्ज होने के बाद विभाग ने आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) को भी सक्रिय कर दिया है, जो महिला सुरक्षा संबंधी नीतियों के तहत प्रारंभिक तथ्यों की जांच करेगी।

पुलिस मुख्यालय की प्रतिक्रिया

पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रारंभिक बयान में कहा गया है कि विभाग किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाता है। सभी कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोप सिद्ध होने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

आंतरिक जांच समिति की भूमिका

छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में गठित आंतरिक जांच समिति (ICC) कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है। यह समिति यौन उत्पीड़न की शिकायतों की स्वतंत्र जांच करती है और अपनी सिफारिशें विभागीय प्रमुख को भेजती है। इस मामले में भी समिति को तथ्यों की पुष्टि करने और प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

कानूनी प्रावधान और महिला सुरक्षा

इस तरह के मामलों में कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के तहत जांच की जाती है। यह कानून कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों की संवेदनशील और निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया और पारदर्शिता की माँग

यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय नागरिकों में चर्चा तेज हो गई है। लोग पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की माँग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी महिला सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की है।

डिस्क्लेमर

यह समाचार प्रारंभिक उपलब्ध जानकारी और मीडिया स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। जांच पूरी होने तक आरोप सिद्ध नहीं माने जा सकते। यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और किसी भी व्यक्ति या संस्था के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखता। पाठकों से अनुरोध है कि जांच रिपोर्ट जारी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुँचें।

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