दिनांक: 23 दिसंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग NH-130 पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि सड़क सुरक्षा के मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के आदेश जारी किए हैं।

ब्लैक स्पॉट्स को लेकर सख्त रुख
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने NH-130 पर चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स का हवाला देते हुए कहा कि इन स्थानों पर पहले भी कई गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद सुरक्षा उपायों में सुधार नहीं किया गया, जो बेहद चिंताजनक है। अदालत ने सवाल उठाया कि जब खतरे की पहचान पहले ही हो चुकी है, तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
राज्य सरकार से मांगी गई रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे NH-130 पर सड़क सुरक्षा से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। इस रिपोर्ट में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, लगाए गए संकेतकों, स्पीड ब्रेकर, लाइटिंग और अन्य सुरक्षा इंतजामों की जानकारी शामिल करने को कहा गया है।
आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। सड़क की खराब स्थिति, संकेतकों की कमी और पर्याप्त रोशनी न होना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालने जैसा है। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए।
दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता
NH-130 पर पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कई हादसों में लोगों की जान भी जा चुकी है। जनहित याचिका के माध्यम से यह मामला हाई कोर्ट के सामने लाया गया था, जिसमें सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की गई थी।
जल्द सुधार के निर्देश
हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर तत्काल आवश्यक सुधार किए जाएं। इसमें चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर, स्पीड कंट्रोल उपाय और सड़क की मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं। अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि अगली सुनवाई में प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का यह सख्त रुख सड़क सुरक्षा के प्रति राज्य की जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इन निर्देशों पर कितनी तेजी और गंभीरता से अमल करती है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार लेख न्यायालय की कार्यवाही और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। कानूनी प्रक्रिया जारी रहने के कारण भविष्य में आदेशों या तथ्यों में बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित न्यायालय या सरकारी विभाग द्वारा जारी सूचना को प्राथमिकता दें।











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