रायपुर, 14 अक्टूबर 2025 · स्थानीय संवाददाता
7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल
छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने भारतमाला परियोजना से जुड़े भर्त्सना भूमि घोटाले में 7,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दायर कर दी है। इस घोटाले में कुल ₹32 करोड़ रुपये की अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि कुछ राजस्व अधिकारियों, ठेकेदारों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर सरकारी नियमों की अनदेखी की और गलत भुगतान प्राप्त किए।

राजस्व अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत
चार्जशीट में कई वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों, क्लर्कों और भूमि दलालों के नाम शामिल किए गए हैं। आरोपियों पर मुआवज़ा प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करने, जाली दस्तावेज़ तैयार करने और सरकारी धन को गलत खातों में ट्रांसफर करने का आरोप है। जांच एजेंसी ने बड़ी मात्रा में फर्जी बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज़ और भूमि पंजीयन प्रमाण जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार की परतें शामिल हैं।
कैसे हुआ ₹32 करोड़ का नुकसान
EOW की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ भूखंडों को जानबूझकर गलत श्रेणी में दर्ज किया गया ताकि परियोजना मुआवज़े के नाम पर अधिक राशि निकाली जा सके। कई मामलों में पहले से भुगतान हो चुकी भूमि के लिए दोबारा मुआवज़ा लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लाभार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले गए और मुआवज़े की राशि वहीं ट्रांसफर कर दी गई।
राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ऐसे भ्रष्टाचार मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टरों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भूमि अधिग्रहण और मुआवज़ा वितरण की पुरानी फाइलों की समीक्षा की जाए। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में सभी मुआवज़ा भुगतान प्रक्रियाएँ डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम के तहत होंगी।
EOW की जांच और आगामी कार्रवाई
EOW ने आरोपियों की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है और कई संपत्तियों पर कुर्की की कार्रवाई की जा रही है। इस मामले की अगली सुनवाई नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, आगे और भी नाम चार्जशीट में शामिल हो सकते हैं और आपराधिक धाराएं बढ़ाई जा सकती हैं। यह कार्रवाई राज्य में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
भविष्य के लिए सीख और सुधार
भूमि विशेषज्ञों का कहना है कि इस घोटाले ने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन और थर्ड पार्टी ऑडिट लागू किया गया होता, तो ऐसे फर्जीवाड़े को रोका जा सकता था। EOW की यह कार्रवाई प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों और समाचार स्रोतों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल सूचना उद्देश्य के लिए है। किसी भी कानूनी या आधिकारिक निर्णय के लिए संबंधित विभाग, न्यायालय या सरकारी प्रेस विज्ञप्ति को प्राथमिक स्रोत माना जाए। यह वेबसाइट किसी भी प्रकार के राजनीतिक या संस्थागत पक्षपात से मुक्त है।











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