प्रकाशित: 7 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
माओवादी विरोधी अभियान में नई प्रगति
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में चल रहे माओवादी-विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण प्रगति का दावा किया है। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी कि 2026 जनवरी तक राज्य को “माओवादी-मुक्त” घोषित किया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई, सड़क और संचार नेटवर्क के विस्तार, तथा स्थानीय जनजातीय समुदायों के सहयोग से माओवाद की जड़ें कमजोर पड़ी हैं।

सरकारी रणनीति और कार्रवाई
राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं, जिनमें बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे प्रभावित इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई शामिल रही। इसके साथ ही प्रशासन ने विकास योजनाओं को गांवों तक पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया है — जिनमें सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाएँ प्रमुख हैं। सरकार का मानना है कि सामाजिक और आर्थिक विकास से ही माओवादी विचारधारा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
स्थानीय समुदायों की भूमिका
माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग निर्णायक साबित हुआ है। अब कई ऐसे गांव जो पहले माओवादियों के प्रभाव में थे, उन्होंने आत्मसमर्पण और विकास का रास्ता चुना है। ग्रामीणों ने सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के भरोसे को स्वीकार किया है। इस बदलाव से क्षेत्र में विश्वास बहाली की प्रक्रिया तेज हुई है।
सुरक्षा बलों की उपलब्धियाँ
राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों ने 2024-25 के दौरान कई बड़ी कार्रवाईयाँ की हैं, जिनमें दर्जनों माओवादी आत्मसमर्पण और प्रमुख कैडर की गिरफ्तारी शामिल है। कई नक्सल-प्रभावित जिलों में नए पुलिस कैंप खोले गए हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक कानून व्यवस्था की पहुँच मजबूत हुई है। साथ ही, ड्रोन सर्विलांस और सैटेलाइट तकनीक के उपयोग ने सुरक्षा अभियानों को और प्रभावी बनाया है।
विशेषज्ञों की राय
सुरक्षा और नीति विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह दावा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सीमावर्ती इलाकों में कुछ सक्रिय माओवादी गुट अब भी मौजूद हैं, जो नए इलाकों में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए, प्रशासन को सतर्कता और विकास दोनों को समान गति से आगे बढ़ाना होगा।
डिसकलेमर
यह लेख सरकारी बयानों, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और विश्वसनीय मीडिया स्रोतों पर आधारित है। स्थिति समय के साथ बदल सकती है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सरकारी या सुरक्षा एजेंसी के अपडेट से ताज़ा जानकारी प्राप्त करें। लेखक/प्रकाशक किसी भी संभावित त्रुटि या अद्यतन में देरी के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।











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