रायपुर, 9 अक्टूबर 2025 — छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। पार्टी ने वरिष्ठ नेता अजय कुमार लल्लू को संगठन में पर्यवेक्षक (Observer) पद से हटा दिया है। इस फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए इसे पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी का परिणाम बताया है।

पद से हटाने पर उठे सवाल
अजय कुमार लल्लू, जो पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन अचानक उन्हें इस पद से हटा दिया गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लल्लू की कार्यशैली से कुछ वरिष्ठ नेता असंतुष्ट थे और रिपोर्टों में यह बात सामने आई कि उन्होंने राज्य के कुछ नेताओं के साथ समन्वय नहीं बैठाया।
भाजपा ने किया कांग्रेस पर हमला
भाजपा नेताओं ने इस कदम को कांग्रेस की अंदरूनी कलह से जोड़ा है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि “कांग्रेस में अनुशासन की जगह गुटबाजी हावी हो चुकी है। जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी जाती है, उन्हें कुछ ही महीनों में हटा दिया जाता है। यह बताता है कि पार्टी में एकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थ चल रहा है।” भाजपा का यह भी कहना है कि लल्लू की हाल ही में भूपेश बघेल से हुई मुलाकात के बाद यह कार्रवाई राजनीतिक संकेत देती है।
कांग्रेस की सफाई
कांग्रेस ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि संगठन में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे किसी साजिश या गुटबाजी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि “अजय कुमार लल्लू हमारे वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें संगठन में अन्य जिम्मेदारियों के लिए विचार किया जा रहा है।”
राजनीतिक संकेत और भविष्य की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में यह बदलाव आने वाले पंचायत और नगरीय चुनावों से पहले संगठन को नई दिशा देने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, इस तरह के निर्णय पार्टी की छवि पर असर डाल सकते हैं, खासकर तब जब विपक्ष इसे गुटबाजी का सबूत बताकर प्रचारित करे।
लल्लू समर्थकों की प्रतिक्रिया
अजय कुमार लल्लू के समर्थकों ने कहा कि उनका नेता पार्टी के लिए हमेशा निष्ठापूर्वक काम करता रहा है और उसे हटाने का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने रायपुर और लखनऊ में विरोध स्वरूप ज्ञापन भी सौंपा।
निष्कर्ष
अजय कुमार लल्लू को हटाने से छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा इस विवाद को कांग्रेस की कमजोरी के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे संगठनात्मक सुधार बता रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में पार्टी इस असंतोष को कैसे संभालती है।
डिस्क्लेमर:
यह समाचार सार्वजनिक मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में व्यक्त विचार या घटनाएँ संबंधित स्रोतों की जानकारी पर आधारित हैं। किसी भी कानूनी या संगठनात्मक निर्णय की पुष्टि के लिए आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या पार्टी दस्तावेज़ को प्राथमिक स्रोत माना जाए।











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