9 नवंबर 2025 — लेखक: अजय वर्मा
डॉ. नरेश त्रेहन की चेतावनी
देश के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ और मेडांटा हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने दिल्ली-एनसीआर की लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इसे “सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा” (Public Health Emergency) करार दिया और सरकार से तत्काल ठोस कार्रवाई की अपील की। उनके अनुसार, यह केवल प्रदूषण नहीं बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य पर सीधा और दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाला संकट है।

वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव
डॉ. त्रेहन ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों की फेफड़ों की क्षमता घट रही है, खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों में श्वसन संक्रमण, दमा, और हृदय रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में सांस की तकलीफ और छाती में दर्द की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या पिछले दो हफ्तों में 30% तक बढ़ी है। उन्होंने कहा कि “हर सांस ज़हर बन चुकी है, और यह स्थिति जल्द ही नियंत्रित न की गई तो दीर्घकालिक स्वास्थ्य संकट में बदल जाएगी।”
सरकार और प्रशासन के लिए सुझाव
डॉ. त्रेहन ने केन्द्र और राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे आपातकालीन ‘एयर क्वालिटी एक्शन प्लान’ लागू करें। उन्होंने निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक, स्कूलों की छुट्टियाँ, वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण, और खुले में कचरा व पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई जैसे कदम सुझाए। उन्होंने कहा कि “यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी का है।”
अस्पतालों में बढ़ती भीड़ और चिकित्सकीय तैयारी
मेडांटा और अन्य प्रमुख अस्पतालों में वायु प्रदूषण से प्रभावित मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण के चलते आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। चिकित्सक नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि वे सुबह-शाम के समय बाहर निकलने से बचें, मास्क का नियमित उपयोग करें और घरों में एयर-प्यूरिफायर या पौधों का इस्तेमाल बढ़ाएँ।
जनजागरूकता की आवश्यकता
डॉ. त्रेहन ने कहा कि केवल सरकारी कदम पर्याप्त नहीं होंगे; नागरिकों को भी अपने स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण में योगदान देना होगा। वाहन कम चलाना, धूल-धुएँ से बचाव, हरियाली बढ़ाना और कचरा जलाने से परहेज़ जैसी आदतें अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की रक्षा करे।”
निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता ने फिर एक बार यह सवाल खड़ा किया है कि क्या देश की राजधानी सांस लेने के लिए सुरक्षित है? डॉ. नरेश त्रेहन की चेतावनी केवल चिकित्सा दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के रूप में भी महत्वपूर्ण है। यदि तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह प्रदूषण एक ‘साइलेंट किलर’ साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। प्रदूषण स्तर समय-समय पर बदल सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए हमेशा योग्य चिकित्सक से संपर्क करें और आधिकारिक प्रदूषण सूचकांक की जानकारी ही मानक स्रोत के रूप में देखें।















Leave a Reply