दिल्ली वायु प्रदूषण पर शशि थरूर का तीखा बयान — “सरकार ने जनता को धुंध में छोड़ दिया”

दिल्ली वायु प्रदूषण पर शशि थरूर का तीखा बयान — “सरकार ने जनता को धुंध में छोड़ दिया”

प्रकाशित: 6 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “दिल्ली की हवा अब सांस लेने लायक नहीं रह गई है, और सरकारें केवल बयानबाज़ी में व्यस्त हैं।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई इलाकों में 450 के पार पहुंच गया है, जिसे “गंभीर श्रेणी” माना जाता है।

थरूर का बयान और सरकार पर आरोप

थरूर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा — “दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है, और लोग हर सांस के साथ बीमार हो रहे हैं। सरकारें केवल एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगी हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।” उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर प्रदूषण से लड़ने की रणनीति बनानी चाहिए, न कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहिए।

सांसद ने यह भी कहा कि जब तक परिवहन, निर्माण और पराली जलाने पर सख्त नियंत्रण नहीं होगा, तब तक दिल्ली में राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में “ग्रीन डे” अभियान चलाकर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए।

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली के आनंद विहार, जहांगीरपुरी, और आरके पुरम क्षेत्रों में AQI 480 से अधिक दर्ज किया गया है। यह स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में सूक्ष्म कण (PM 2.5) और (PM 10) की मात्रा सामान्य से चार से पाँच गुना अधिक हो चुकी है।

वायु गुणवत्ता गिरने से स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित की गई हैं और निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है। कई नागरिक संगठनों ने सरकार से “क्लीन एयर इमरजेंसी” घोषित करने की मांग की है।

सरकार की प्रतिक्रिया और जनता की चिंता

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर काबू पाने के लिए “ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)” के तहत कुछ कदम उठाए हैं। इसमें डीज़ल वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध, स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएँ, और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हैं।

हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम “अल्पकालिक” हैं और जमीनी स्तर पर बदलाव की आवश्यकता है। नागरिकों ने भी सोशल मीडिया पर सरकार से अपील की है कि हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ठोस दीर्घकालिक नीतियाँ लागू की जाएँ।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। साथ ही, N95 मास्क पहनने और पौधों से युक्त इनडोर वातावरण बनाए रखने की सलाह दी गई है।

डिस्क्लेमर:

यह लेख सार्वजनिक समाचार स्रोतों और सांसद शशि थरूर के बयानों पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित व्यक्तियों के हैं। वेबसाइट या लेखक की व्यक्तिगत राय नहीं है। आधिकारिक आंकड़ों या सरकारी नीतियों में बदलाव के साथ जानकारी अद्यतन की जा सकती है।

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