तारीख: 27 अक्टूबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने अपने संबद्ध कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे 10% आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए ‘सामर्थ्य पोर्टल’ के माध्यम से अतिरिक्त शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों की मांग प्रस्तुत करें। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कदम EWS कोटे के तहत विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या के अनुरूप शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षमता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

पृष्ठभूमि: EWS आरक्षण और उसका विस्तार
भारत सरकार ने 2019 में उच्च शिक्षा संस्थानों में 10% EWS आरक्षण लागू करने की घोषणा की थी। इस नीति के अंतर्गत सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी आरक्षण का लाभ मिलता है। हालांकि, कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सीटों के विस्तार के बाद भी शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
दिल्ली विश्वविद्यालय ने कहा कि शिक्षण गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए कॉलेजों को अब अतिरिक्त पदों की स्वीकृति की आवश्यकता होगी, जिसे ‘सामर्थ्य पोर्टल’ के माध्यम से केंद्रीकृत रूप से ट्रैक किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य
DU प्रशासन का मानना है कि बढ़ी हुई सीटों और छात्रसंख्या के अनुपात में यदि पर्याप्त संकाय और स्टाफ उपलब्ध नहीं होंगे, तो शिक्षण प्रक्रिया पर असर पड़ेगा। इसीलिए विश्वविद्यालय ने सभी संबद्ध कॉलेजों को शीघ्र प्रस्ताव जमा करने के निर्देश दिए हैं।
DU के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “EWS नीति के तहत सीटों में 25% तक वृद्धि हुई है, लेकिन कई कॉलेजों में अभी तक आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संगठित होगी।”
शिक्षकों और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया
DU शिक्षक संघ (DUTA) ने विश्वविद्यालय के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि जब तक वास्तविक नियुक्तियाँ नहीं होतीं, तब तक मौजूदा शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि “EWS आरक्षण का उद्देश्य तभी सफल होगा जब पर्याप्त संकाय और अवसंरचना उपलब्ध हो।”
छात्र संगठनों ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि प्रक्रिया को त्वरित गति से पूरा किया जाए ताकि अगले शैक्षणिक सत्र तक इसका लाभ विद्यार्थियों को मिल सके।
आगे की दिशा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में कॉलेजों से प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार नए पदों की मंजूरी दी जाएगी। इस प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) का भी समन्वय रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल समय पर लागू की गई, तो यह दिल्ली विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।
डिस्क्लेमर
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बयानों पर आधारित है। विवरण समय-समय पर परिवर्तित हो सकते हैं। कृपया किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय की वेबसाइट या संबंधित अधिसूचना देखें।
यह लेख केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है, इसमें किसी संस्था या व्यक्ति के प्रति कोई पूर्वाग्रह या टिप्पणी निहित नहीं है।















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