धमतरी, 5 अक्टूबर 2025: लगातार हो रही भारी बारिश के कारण धमतरी जिले के चार प्रमुख बाँध — गंगरेल, मुरुमसिली, न्यू रुद्री बैराज और सोनदूर डैम — अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुँच चुके हैं। जल स्तर बढ़ने के चलते जल संसाधन विभाग ने गंगरेल बाँध से 55,000 क्यूसक पानी छोड़ा है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही तेज बारिश से जिले के सभी जलाशयों में पानी की आवक लगातार बढ़ रही थी। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि धमतरी और आसपास के इलाकों में अगले 48 घंटे तक भारी वर्षा जारी रह सकती है। प्रशासन के अनुसार बाँधों की सुरक्षा और जल स्तर को नियंत्रित रखने के लिए गंगरेल डैम के कई गेट खोले गए हैं ताकि अतिरिक्त पानी सुरक्षित रूप से निकाला जा सके।
गंगरेल बाँध, जिसे रविशंकर सागर बाँध के नाम से भी जाना जाता है, महानदी नदी पर स्थित है और यह प्रदेश का एक प्रमुख जलस्रोत है। बाँध से छोड़ा गया पानी अब नीचे के क्षेत्रों जैसे रूद्री, अर्जुनी, कोलियारी और कुरूद के कुछ हिस्सों तक पहुँचने लगा है। प्रशासन ने वहाँ के ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।
इसी प्रकार, मुरुमसिली डैम और सोनदूर डैम में भी जलस्तर अपनी अधिकतम सीमा पर है। न्यू रुद्री बैराज से भी सीमित मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है ताकि संतुलन बनाए रखा जा सके। बाँधों के आसपास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है, और आपदा प्रबंधन दल लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं।
धमतरी जिला कलेक्टर ने कहा कि सभी विभाग — पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और बिजली वितरण — हाई अलर्ट पर हैं। यदि पानी का स्तर और बढ़ता है तो प्रभावित परिवारों को सुरक्षित शेल्टर में स्थानांतरित किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में माइक और जागरूकता वाहनों के माध्यम से लोगों को सूचित किया जा रहा है।
किसानों और पशुपालकों से भी अपील की गई है कि वे फसल और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएँ। प्रशासन ने बताया कि बिजली और पेयजल की सप्लाई की स्थिति पर भी लगातार निगरानी की जा रही है ताकि आपूर्ति बाधित न हो।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि दूषित पानी से बचें और जलजनित बीमारियों से सतर्क रहें। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की विशेष देखभाल करने को कहा गया है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी नागरिक केवल सरकारी स्रोतों और आधिकारिक अलर्ट पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं से बचें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासनिक सहायता प्राप्त करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। मौसम की परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, इसलिए पाठकों से अनुरोध है कि वे किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन के निर्देशों का पालन करें। इस लेख का उद्देश्य केवल जनहित में जानकारी प्रदान करना है।














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