स्थान: धमतरी, छत्तीसगढ़ | तारीख: 31 अगस्त 2025
धमतरी जिले में आज कृषि विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खाद, बीज और कीटनाशकों की दुकानों पर अचानक छापेमारी की। इस अभियान का उद्देश्य जिले में हो रही कालाबाज़ारी, नकली उत्पादों की बिक्री और किसानों के शोषण को रोकना था। विभाग की यह छापेमारी किसानों के लिए राहतभरी मानी जा रही है, जो लंबे समय से घटिया गुणवत्ता की खाद और बीज से परेशान थे।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कई दुकानों पर स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी पाई गई। कुछ दुकानों में एक्सपायर्ड कीटनाशक बेचने की शिकायतें भी मिलीं। कुछ दुकानदार एमआरपी से अधिक कीमत पर उत्पाद बेच रहे थे, जबकि कुछ के पास लाइसेंस और बिलिंग से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इन दुकानदारों पर जुर्माना लगाया गया है, साथ ही उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी आर.के. साहू ने कहा, “यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। हमारा उद्देश्य किसानों को सही समय पर, सही मूल्य में और सही गुणवत्ता वाला उत्पाद उपलब्ध कराना है। दुकानदारों को चेतावनी दी जाती है कि वे अपने स्टॉक और दस्तावेजों को अपडेट रखें तथा नियमों का पालन करें।”
कई किसानों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। रामदयाल यादव, जो कि कुरूद ब्लॉक से हैं, ने कहा, “हमें सालों से घटिया खाद मिल रही थी। उम्मीद है कि अब स्थिति सुधरेगी और हमें सही उत्पाद मिलेगा।”
यह छापेमारी सिर्फ धमतरी तक सीमित नहीं है। राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह के निरीक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार नकली और महंगे उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपना चुकी है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नकली या घटिया गुणवत्ता वाले बीज और कीटनाशक न केवल किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। ऐसे में इस तरह की छापेमारी और निगरानी से न केवल फसल की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि किसान भी आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करेंगे।
जिला प्रशासन ने भी जनता से अपील की है कि अगर उन्हें किसी दुकान पर अनियमितता नजर आती है तो वे तुरंत इसकी शिकायत करें ताकि कार्रवाई की जा सके।
⚠️ डिस्क्लेमर:
यह समाचार स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी अधिकारियों के बयान पर आधारित है। इस लेख में दी गई जानकारी सत्यता के लिए पूरी तरह सरकारी स्रोतों द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले अधिकृत स्रोतों से पुष्टि अवश्य करें।














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