दिनांक: 9 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में धान खरीदी व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। कई धान उपार्जन केंद्रों में धान का उठाव समय पर नहीं हो पाने के कारण बड़ी मात्रा में धान जाम हो गया है, जिससे खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्हें अपनी उपज बेचने के लिए घंटों और कई बार दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

उपार्जन केंद्रों में जगह की भारी कमी
जानकारी के अनुसार, धान खरीदी केंद्रों में पहले से जमा धान का परिवहन नहीं होने के कारण नई फसल रखने के लिए जगह नहीं बची है। कई केंद्रों पर धान की बोरियां खुले में पड़ी हैं, जिससे बारिश और नमी के कारण खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि वे सुबह से केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खरीदी नहीं हो पा रही।
उठाव में देरी बनी मुख्य वजह
धान जाम होने का सबसे बड़ा कारण मिलों और गोदामों तक धान का उठाव समय पर नहीं होना बताया जा रहा है। परिवहन व्यवस्था की कमी, ट्रकों की अनुपलब्धता और प्रशासनिक सुस्ती के चलते धान लंबे समय तक केंद्रों में पड़ा रहता है। इससे खरीदी की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो रही है और किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
किसानों की बढ़ती चिंताएं
किसानों का कहना है कि धान बेचकर उन्हें अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करनी होती हैं, लेकिन खरीदी में हो रही देरी से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसान दूर-दराज के गांवों से धान लेकर आते हैं और केंद्रों पर रुकने के लिए उनके पास न तो उचित व्यवस्था होती है और न ही कोई सुविधा। इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
किसानों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हर साल धान खरीदी के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया जाता। यदि पहले से उठाव और भंडारण की ठोस योजना बनाई जाती, तो किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
समाधान की मांग तेज
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि धान उठाव की प्रक्रिया को तेज किया जाए, अतिरिक्त ट्रकों और गोदामों की व्यवस्था की जाए तथा उपार्जन केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही खरीदी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठ रही है।
फिलहाल धान खरीदी व्यवस्था में सुधार के संकेत कम नजर आ रहे हैं, लेकिन यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।
डिस्क्लेमर
यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, स्थानीय सूत्रों और प्रारंभिक जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी समय के साथ बदल सकती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी आधिकारिक पुष्टि या अद्यतन जानकारी के लिए संबंधित विभाग अथवा विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर ही भरोसा करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की त्रुटि, नुकसान या गलत व्याख्या के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।













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