दिनांक: 27 जनवरी 2026 | लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर एक ऐतिहासिक और भावनात्मक खबर सामने आई है। लंबे समय तक माओवादी प्रभाव और भय के साये में जी रहे बस्तर के 41 गांवों में इस बार पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और शांति की जीत का प्रतीक बनकर उभरा। इन गांवों में तिरंगे की गूंज ने यह संदेश दिया कि अब हालात बदल रहे हैं और विकास तथा विश्वास की नई शुरुआत हो चुकी है।

लंबे समय तक माओवादी नियंत्रण में रहे गांव
बस्तर क्षेत्र के कई गांव दशकों तक माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। इन इलाकों में राष्ट्रीय पर्व मनाना भी लोगों के लिए जोखिम भरा माना जाता था। भय, दबाव और हिंसा के कारण ग्रामीण खुलकर लोकतांत्रिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पाते थे। ऐसे में 41 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जाना अपने आप में एक बड़ा बदलाव और सकारात्मक संकेत है।
सुरक्षा बलों और प्रशासन की अहम भूमिका
इस ऐतिहासिक पहल के पीछे सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन की बड़ी भूमिका रही। बीते कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए सुरक्षा अभियानों, विकास योजनाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के कारण इन क्षेत्रों में भरोसे का माहौल बना है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए, ताकि ग्रामीण बिना किसी डर के राष्ट्रीय ध्वज फहराने और समारोह में शामिल हो सकें।
ग्रामीणों में दिखा उत्साह और गर्व
तिरंगा फहराते समय गांव के बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों के चेहरों पर अलग ही खुशी और गर्व देखने को मिला। कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहली बार खुले तौर पर राष्ट्रीय पर्व मनाया है। देशभक्ति के नारों, राष्ट्रगान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। यह क्षण उनके लिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि भय से आज़ादी का प्रतीक था।
लोकतंत्र और विकास की ओर मजबूत कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर हो रहे सुधारों का परिणाम है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी योजनाएं अब धीरे-धीरे इन गांवों तक पहुंच रही हैं। जब लोग लोकतंत्र और संविधान पर भरोसा करने लगते हैं, तो हिंसा और उग्रवाद की पकड़ कमजोर होती है।
भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश
बस्तर के 41 गांवों में तिरंगा फहराया जाना पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह दिखाता है कि संवाद, विकास और सुरक्षा के संतुलन से सबसे कठिन हालातों में भी बदलाव संभव है। आने वाले समय में उम्मीद की जा रही है कि और भी गांव मुख्यधारा से जुड़ेंगे और राष्ट्रीय पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाए जाएंगे।
Disclaimer
यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। किसी भी आधिकारिक पुष्टि, निर्णय या विस्तृत विवरण के लिए संबंधित सरकारी विभाग या प्रामाणिक स्रोतों की जांच अवश्य करें।













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