17 November 2025 | लेखक: Ajay Verma
धमधा के वार्ड 51 में बढ़ा तनाव
दुर्ग जिले के धमधा नगर के वार्ड 51 में रहने वाले लगभग 121 परिवारों पर अपने घरों के टूटने का संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने जिस भूमि को विवादित बताया है, उस पर वर्षों से निवासरत लोगों को अब बेघर होने का डर सताने लगा है। इस विवाद ने न केवल इलाके में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा छेड़ दी है। परिवारों का कहना है कि वे दशकों से इस भूमि पर रह रहे हैं, बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएँ भी उन्हीं के नाम से मिलती हैं, ऐसे में अचानक घर तोड़ने की कार्रवाई बेहद अनुचित है।

हाई कोर्ट का संज्ञान और नोटिस जारी
प्रभावित परिवारों की ओर से याचिका दायर करने के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि बिना पुनर्वास योजना के इतने बड़े पैमाने पर निवासियों को उजाड़ने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया। उच्च न्यायालय ने प्रशासन से इस निर्णय का विस्तृत जवाब मांगा है और अगली सुनवाई में सभी संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। यह नोटिस उन परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जो पिछले कई महीनों से तोड़फोड़ की कार्रवाई के डर में जी रहे थे।
नागरिकों और स्थानीय प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
वार्ड 51 के नागरिकों ने कहा कि वे पांच दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और कई परिवारों ने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर मकान बनाए हैं। उनका कहना है कि यदि भूमि विवादित थी, तो पहले ही स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए थी। कई स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर सरकारी सुविधाएँ और कर रिकॉर्ड नियमित रूप से जारी होते रहे हैं, वहां अचानक ‘अवैध निर्माण’ का दावा करना उचित नहीं है। मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है, क्योंकि विपक्ष ने प्रशासन पर अव्यवस्थित योजना और आम जनता के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है।
आगे क्या हो सकता है?
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई कुछ समय के लिए रुकी रह सकती है। कोर्ट की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि परिवारों के घर तोड़े जाएंगे या सरकार को पहले पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के विवादों में पारदर्शी जांच और उचित पुनर्वास योजना अनिवार्य होती है। यदि प्रशासन कोर्ट को पर्याप्त दस्तावेजों के साथ यह साबित नहीं कर पाता कि निर्माण अवैध है, तो प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
कुल मिलाकर धमधा का यह मामला न केवल कानूनी बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 121 परिवारों के भविष्य का फैसला अब अदालत के आगामी निर्देश पर निर्भर करेगा।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। कृपया किसी भी तथ्य की आधिकारिक पुष्टि स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभाग से अवश्य करें। यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।











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