तारीख: 27 अक्टूबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों के समक्ष 21 माओवादी कैडर ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इनमें से 13 वरिष्ठ माओवादी सदस्य बताए जा रहे हैं, जो लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे। यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की “लोन वर्राटू” (घर वापसी) नीति की एक और बड़ी सफलता मानी जा रही है।

आत्मसमर्पण का विवरण
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कोंडागांव, कोयलीबेड़ा, प्रतापपुर और आसपास के जंगलों में सक्रिय थे। उन्होंने हथियार और गोला-बारूद सौंपते हुए बताया कि अब वे हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं।
जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में कई पर सरकारी योजनाओं के प्रति भ्रम फैलाने और सुरक्षाबलों पर हमले के आरोप थे। इन सभी को पुनर्वास योजना के तहत सहायता दी जाएगी।
‘लोन वर्राटू’ अभियान की सफलता
छत्तीसगढ़ सरकार का “लोन वर्राटू” अभियान, जिसका अर्थ है ‘घर वापस आओ’, नक्सल प्रभावित इलाकों में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत अब तक सैकड़ों नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ चुके हैं। सरकार उन्हें पुनर्वास, आवास, शिक्षा और रोजगार की सुविधाएँ प्रदान करती है ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
अधिकारियों ने बताया कि कांकेर में हुई यह आत्मसमर्पण की घटना इस नीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है और स्थानीय स्तर पर शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वरिष्ठ कैडर का आत्मसमर्पण — संगठन के लिए झटका
आत्मसमर्पण करने वाले 13 वरिष्ठ माओवादी लंबे समय से जंगलों में संगठन की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इनके आत्मसमर्पण से संगठन की रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा।
इन वरिष्ठ कैडरों ने बताया कि वे लगातार तनाव और भय में जीवन जी रहे थे, और अब सरकार की नीतियों और पुलिस के मानवीय व्यवहार से प्रेरित होकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने इस आत्मसमर्पण का स्वागत करते हुए कहा कि “हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। जो लोग समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, सरकार उनका स्वागत करती है।”
पुलिस अधिकारियों ने भी विश्वास जताया कि आने वाले महीनों में और भी माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे, जिससे कांकेर और आसपास के इलाकों में शांति स्थापित होगी।
डिस्क्लेमर
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और सरकारी बयानों पर आधारित है। विवरण समय-समय पर बदल सकते हैं। कृपया किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस या गृह विभाग की वेबसाइट देखें।
यह लेख केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है, इसमें किसी व्यक्ति या संस्था के प्रति कोई पूर्वाग्रह या आरोप निहित नहीं है।












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