9 नवंबर 2025 — लेखक: अजय वर्मा
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडा में छत्तीसगढ़ की प्राथमिकता
भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह पहल नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति, विकास और प्रशासनिक पहुँच को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। केंद्र का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सली गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है, और अब सरकार अंतिम चरण की कार्रवाई में जुटी है।

केंद्रीय और राज्य सरकार का संयुक्त अभियान
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस मिशन को सफल बनाने के लिए ‘ऑपरेशन समर्पण 2025’ के तहत काम कर रही हैं। इस अभियान में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाइयों की संयुक्त भागीदारी है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में कहा कि “छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब समाप्ति के अंतिम चरण में है, और सरकार का उद्देश्य है कि 2026 की पहली तिमाही तक राज्य को पूरी तरह नक्सलमुक्त घोषित किया जा सके।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन इलाकों में अब भी sporadic हमले होते हैं, वहाँ तकनीकी निगरानी और स्थानीय संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।
विकास और पुनर्वास पर फोकस
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब सरकार केवल सुरक्षा अभियान पर ही नहीं बल्कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार पर भी ध्यान दे रही है। केंद्र सरकार ने “विकास से विश्वास” योजना के तहत बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में 4000 करोड़ रुपये के विकास प्रोजेक्ट स्वीकृत किए हैं। इन योजनाओं के माध्यम से सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और मोबाइल टावरों का तेजी से निर्माण किया जा रहा है।
इसके साथ ही आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले 18 महीनों में लगभग 800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
राज्य सरकार की भूमिका और भविष्य की रणनीति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं ने कहा कि केंद्र के सहयोग से छत्तीसगढ़ जल्द ही उस स्थिति में होगा जब हर गांव में पुलिस, प्रशासन और विकास योजनाओं की पहुँच होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 200 नए पुलिस कैम्प, बेहतर सड़कें और हेलीकॉप्टर सप्लाई लाइन स्थापित करने की योजना बनाई है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन मौजूदा रणनीति, स्थानीय जनसहभागिता और प्रशासनिक सक्रियता से इसे समय सीमा के भीतर हासिल किया जा सकता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि नक्सलवाद की जड़ें अब वैचारिक नहीं बल्कि स्थानीय असमानताओं से जुड़ी हैं, जिन्हें विकास और शिक्षा के माध्यम से दूर किया जा सकता है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का नक्सल-मुक्त होना न केवल राज्य बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम होगा। यदि केंद्र और राज्य की संयुक्त रणनीति जमीन पर सही ढंग से लागू होती है, तो 2026 तक यह लक्ष्य वास्तव में साकार हो सकता है।
डिस्क्लेमर
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी बयानों, प्रेस विज्ञप्तियों और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति समय-समय पर बदल सकती है। किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए कृपया गृह मंत्रालय या छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक स्रोतों को देखें। लेखक या प्रकाशन किसी भी तथ्यात्मक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार नहीं हैं।












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