दिनांक: 15 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
भूमिका
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाओं की एक नई पहचान उभरकर सामने आ रही है, जिन्हें “कृषि सखी” कहा जा रहा है। ये महिलाएं न केवल स्वयं खेती में नवाचार अपना रही हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी रसायन-मुक्त और प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। कृषि सखियों के प्रयासों से कई गांवों की तस्वीर बदल रही है और खेती को एक बार फिर लाभकारी बनाया जा रहा है।

कृषि सखी: महिला सशक्तिकरण की मिसाल
कृषि सखियां वे प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाएं हैं, जिन्हें जैविक और प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी जाती है। ये महिलाएं गांव-गांव जाकर किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करती हैं। साथ ही गोबर, गोमूत्र, जैविक खाद और देसी उपायों से खेती करने के तरीके भी सिखाती हैं।
रसायन-मुक्त खेती की ओर बढ़ता कदम
कृषि सखियों की पहल से अब कई गांवों में रसायन-मुक्त खेती अपनाई जा रही है। इससे मिट्टी की सेहत में सुधार हुआ है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है। किसान धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत घट रही है और मुनाफा बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण को मिल रहा लाभ
रसायन-मुक्त खेती से न केवल पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। जहरीले कीटनाशकों के उपयोग में कमी आने से जल, मिट्टी और हवा प्रदूषण घट रहा है। साथ ही लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो रही है।
किसानों की सोच में बदलाव
पहले जहां कई किसान जैविक खेती को जोखिम भरा मानते थे, वहीं अब कृषि सखियों के अनुभव और मार्गदर्शन से उनकी सोच बदल रही है। प्रशिक्षण शिविरों और खेतों में किए गए प्रयोगों से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। कई किसान अपने अनुभव साझा कर दूसरों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
आर्थिक स्थिति में सुधार
रसायन-मुक्त खेती अपनाने से किसानों की लागत कम हुई है, जिससे उनकी आय में सुधार हो रहा है। इसके साथ ही कृषि सखियों को भी सम्मान और आय का नया स्रोत मिला है। महिलाएं अब केवल गृहिणी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
सरकारी योजनाओं का सहयोग
राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती और महिला समूहों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। प्रशिक्षण, बीज, जैविक खाद और विपणन सुविधाओं के माध्यम से कृषि सखियों को सहयोग दिया जा रहा है, जिससे यह अभियान और मजबूत हो रहा है।
निष्कर्ष
कृषि सखियों के प्रयासों से छत्तीसगढ़ के गांवों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। रसायन-मुक्त खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित हो रही है। यह पहल महिला सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण अनुभवों पर आधारित है। किसी भी योजना या तकनीक को अपनाने से पहले संबंधित कृषि विभाग या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की त्रुटि या नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।













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