नेपाल के राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने देश की संसद को भंग कर दिया है और आगामी 5 मार्च, 2026 को नए आम चुनाव कराने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ महीनों से नेपाल की राजधानी काठमांडू सहित कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, और प्रशासनिक विफलताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस आंदोलन को मुख्य रूप से युवा पीढ़ी और Gen Z द्वारा नेतृत्व दिया गया, जिसमें सोशल मीडिया का बड़ा योगदान रहा।
सरकार ने शुरू में इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ और आंदोलन और भड़क उठा। अंततः, जन दबाव को देखते हुए राष्ट्रपति ने यह कड़ा कदम उठाया।
क्या कहा राष्ट्रपति ने?
राष्ट्रपति पौडेल ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “देश की राजनीतिक प्रणाली को जनविश्वास की आवश्यकता है, जो वर्तमान सरकार और संसद में नहीं दिखाई दे रहा। इसलिए, यह जरूरी है कि जनता को नए प्रतिनिधि चुनने का अवसर दिया जाए।”
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा जो चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से सम्पन्न करवाएगी।
प्रतिक्रियाएँ
- सत्ता पक्ष: इसे “आवश्यक लेकिन कड़ा निर्णय” बताया।
- विपक्ष: इस कदम को देर से उठाया गया मानते हुए कहा कि यह पहले होना चाहिए था।
- सामान्य जनता: राहत की भावना लेकिन साथ ही आगामी चुनावों में पारदर्शिता की उम्मीद।
आगे की राह
नेपाल के निर्वाचन आयोग को अब चुनावों की तैयारी करनी होगी। नई सरकार के गठन तक, एक अंतरिम प्रधानमंत्री की नियुक्ति की जाएगी जो देश की प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ निभाएगा। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव नेपाल की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और सार्वजनिक रिपोर्ट्स पर आधारित है। कृपया किसी राजनीतिक या कानूनी विश्लेषण के लिए आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि अवश्य करें। लेखक या प्रकाशक इस लेख की सामग्री पर आधारित किसी भी निर्णय या कार्रवाई के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।












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