दिनांक: 29 जनवरी 2026
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ में उस समय हड़कंप मच गया, जब राज्य के पांच जिला न्यायालयों को बम विस्फोट की धमकी भरे अनाम ई-मेल प्राप्त हुए। ई-मेल मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और संबंधित न्यायालय परिसरों में तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। हालांकि, गहन तलाशी के बाद किसी भी कोर्ट परिसर से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई।
इस घटना के बाद न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है।
अनाम ई-मेल से मचा हड़कंप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पांच अलग-अलग जिला न्यायालयों को एक जैसे कंटेंट वाले ई-मेल भेजे गए थे, जिनमें कोर्ट परिसर में बम होने का दावा किया गया था। ई-मेल अनाम होने के कारण तत्काल इसकी पुष्टि करना संभव नहीं हो पाया, लेकिन एहतियातन सभी न्यायालयों को खाली कराया गया।
न्यायालय में मौजूद न्यायाधीश, कर्मचारी, वकील और आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर पूरे परिसर को सील कर दिया गया।
सुरक्षा एजेंसियों ने किया सघन तलाशी अभियान
धमकी मिलने के तुरंत बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया गया। सभी कोर्ट परिसरों में घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया। हर कक्ष, दस्तावेज कक्ष, पार्किंग और आसपास के क्षेत्रों की गहन जांच की गई।
तलाशी अभियान के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी कोर्ट से कोई विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।
प्रशासन ने लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आम नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
साथ ही कोर्ट परिसरों की सुरक्षा अस्थायी रूप से और कड़ी कर दी गई है।
ई-मेल भेजने वाले की तलाश शुरू
पुलिस ने अनाम ई-मेल भेजने वाले की पहचान के लिए साइबर सेल की मदद ली है। ई-मेल के स्रोत, आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस तरह की धमकियों को कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश माना जा रहा है।
न्यायालयों की सुरक्षा पर फिर उठा सवाल
इस घटना ने न्यायालयों और अन्य संवेदनशील सरकारी संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यम से मिलने वाली ऐसी धमकियों से निपटने के लिए साइबर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख विभिन्न समाचार स्रोतों और प्रारंभिक जानकारियों पर आधारित है। जांच प्रक्रिया जारी है और आगे चलकर तथ्यों में बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक पुष्टि या अंतिम जानकारी के लिए संबंधित पुलिस, प्रशासन एवं न्यायिक अधिकारियों द्वारा जारी सूचनाओं को ही मान्य माना जाए।













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