तारीख: 4 जनवरी 2026
लेखक: Ajay Verma
छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन से जुड़े चर्चित शराब ‘स्कैम’ मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अन्य आरोपियों के खिलाफ चालानी की प्रक्रिया जारी रहेगी।

उच्च न्यायालय से मिली राहत
चैतन्य बघेल ने शराब घोटाले से जुड़े मामलों में उच्च न्यायालय का रुख किया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें सशर्त जमानत प्रदान की। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है और मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
शराब ‘स्कैम’ मामला क्या है
छत्तीसगढ़ में सामने आए शराब ‘स्कैम’ को लेकर आरोप है कि शराब की खरीद-बिक्री और वितरण व्यवस्था में अनियमितताएं हुईं। इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसियां लंबे समय से इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं और लगातार नए खुलासे हो रहे हैं।
अन्य आरोपियों पर जारी है कार्रवाई
जांच एजेंसियों के अनुसार, चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बावजूद अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। कई मामलों में चालान पेश किए जा चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में जांच अंतिम चरण में है। एजेंसियों का कहना है कि सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। जहां एक ओर समर्थक इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
कानूनी प्रक्रिया जारी
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत मिलना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसका सीधा संबंध अंतिम फैसले से नहीं होता। अदालत में साक्ष्यों, गवाहों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
कुल मिलाकर, पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र को जमानत मिलना शराब ‘स्कैम’ मामले में एक अहम घटनाक्रम है, लेकिन इससे जांच या कानूनी प्रक्रिया पर कोई विराम नहीं लगा है। मामले की सच्चाई न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Disclaimer: यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, न्यायालयी आदेशों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। इसमें उल्लेखित सभी व्यक्ति कानूनन तब तक निर्दोष माने जाते हैं, जब तक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए। मामले से जुड़ी ताज़ा और सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक न्यायालयी दस्तावेज़ों एवं अधिकृत स्रोतों को प्राथमिकता दें।













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