तारीख: 26 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
रबी सीज़न को लेकर किसानों में सक्रियता
धमतरी जिले में रबी फसल के लिए किसानों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। खरीफ सीजन के बाद अब किसान रबी फसलों की बुआई की योजना में जुट गए हैं। जिले के कई गांवों में धान की नर्सरी तैयार की जा रही है, जिससे समय पर रोपाई और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। कृषि विभाग के अनुसार मौसम अनुकूल रहने पर रबी सीजन से किसानों को अच्छी उपज की उम्मीद है।

धान नर्सरी की तैयारी जोरों पर
किसानों द्वारा खेतों की जुताई, समतलीकरण और बीज उपचार का कार्य किया जा रहा है। धान नर्सरी के लिए उन्नत किस्मों के बीजों का चयन किया गया है ताकि फसल रोगों से सुरक्षित रहे और पैदावार अधिक हो। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान सुबह से ही खेतों में जुटकर नर्सरी तैयार करते नजर आ रहे हैं।
सिंचाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान
रबी फसल में सिंचाई की अहम भूमिका होती है। धमतरी जिले में महानदी नहर प्रणाली और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से सिंचाई की योजना बनाई जा रही है। किसान पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए फसल चक्र तय कर रहे हैं। कई स्थानों पर डीजल पंप और बोरवेल के जरिए भी सिंचाई की तैयारी की गई है।
कृषि विभाग की सलाह और सहयोग
कृषि विभाग द्वारा किसानों को रबी फसलों से संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है। विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को समय पर बुआई, उर्वरक उपयोग और कीट नियंत्रण की जानकारी दे रहे हैं। साथ ही संतुलित उर्वरक प्रयोग और मिट्टी परीक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है।
रबी फसलों से बेहतर आय की उम्मीद
धान के साथ-साथ गेहूं, चना, मसूर, सरसों और सब्जी फसलों की खेती की भी योजना बनाई जा रही है। किसानों का मानना है कि यदि मौसम और बाजार अनुकूल रहा, तो रबी सीजन से उन्हें अच्छी आमदनी हो सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मौसम की भूमिका अहम
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में ठंड और नमी रबी फसलों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। हालांकि अत्यधिक ठंड या पाला पड़ने की स्थिति में फसलों को नुकसान भी हो सकता है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
डिस्क्लेमर: यह लेख स्थानीय समाचार स्रोतों, किसानों से प्राप्त जानकारी और कृषि विभाग की सार्वजनिक सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है। फसल उत्पादन, मौसम और कृषि योजनाओं से संबंधित परिस्थितियां समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी कृषि निर्णय से पहले संबंधित कृषि अधिकारी या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।













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