प्रकाशित: 7 नवंबर 2025 | लेखक: अजय वर्मा
विवाद की शुरुआत
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों फर्जी वोटर सूची को लेकर गर्म माहौल है। रायपुर में भाजपा ने दावा किया है कि नगर निगम क्षेत्र में लगभग एक लाख फर्जी मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं। पार्टी नेताओं ने निर्वाचन आयोग से इसकी शिकायत करते हुए मतदाता सूची की जांच और पुनरीक्षण की मांग की है। इस दावे ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

भाजपा के आरोप
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि “रायपुर समेत कई विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम जोड़े गए हैं जो या तो अस्तित्व में नहीं हैं या दो बार दर्ज हैं।” भाजपा का कहना है कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया है ताकि आगामी चुनावों में एक पक्ष को अनुचित लाभ मिल सके। पार्टी ने निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए सभी संदेहास्पद मतदाताओं की भौतिक सत्यापन की मांग की है।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को “बेतुका और राजनीतिक स्टंट” बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा को अपनी हार दिखाई दे रही है, इसलिए वह अब चुनाव से पहले झूठे आरोपों के सहारे माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची का कार्य पूरी तरह निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और उसमें किसी राजनीतिक दल का हस्तक्षेप संभव नहीं है।
निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग ने इस पूरे विवाद पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि किसी भी अनियमितता की स्थिति में जांच कराई जाएगी। आयोग ने दोनों दलों से अपील की है कि वे आरोप-प्रत्यारोप के बजाय प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज करें। अधिकारियों ने बताया कि वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण पहले से ही जारी है और नागरिकों को अपने नाम, पता और जानकारी सत्यापित करने का अवसर दिया गया है।
राजनीतिक माहौल और जनता की राय
राजधानी रायपुर में इस मुद्दे ने चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर दोनों दलों के समर्थकों के बीच तीखी बहसें जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फर्जी वोटर का मुद्दा आने वाले चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। वहीं, आम नागरिकों ने मांग की है कि मतदाता सूची पारदर्शी हो और हर नाम का सत्यापन निष्पक्ष तरीके से किया जाए।
डिसकलेमर
यह समाचार राजनीतिक दलों के बयानों, प्रेस विज्ञप्तियों और निर्वाचन आयोग की प्रारंभिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। जांच पूरी होने तक किसी भी दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती। पाठकों से अनुरोध है कि वे अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक रिपोर्ट या आयोग की घोषणा की प्रतीक्षा करें। लेखक/प्रकाशक किसी भी अपुष्ट सूचना के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।











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