9 नवंबर 2025 — लेखक: अजय वर्मा
दौरे का परिचय
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने अफ्रीकी देशों के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस क्रम में उन्होंने अंगोला की राजधानी लुआंडा (Luanda) पहुंचने पर राजकीय स्वागत प्राप्त किया। अंगोला के राष्ट्रपति और उच्च पदस्थ अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह यात्रा भारत और अफ्रीका के बीच गहराते राजनयिक व आर्थिक संबंधों की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

राजकीय स्वागत और मुलाकातें
लुआंडा में राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत पारंपरिक सैन्य सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। उन्होंने अंगोला के राष्ट्रपति जोआओ लौरेन्सो (João Lourenço) से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ बनाने पर चर्चा की। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई गई।
भारत-अंगोला संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
भारत और अंगोला के राजनयिक संबंध 1985 में स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों ने तेल, खनिज, कृषि और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को धीरे-धीरे मजबूत किया है। भारत अंगोला को प्रशिक्षण, कौशल विकास और आईटी समर्थन प्रदान करता रहा है, जबकि अंगोला भारत के लिए ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बना है।
व्यापार और निवेश के नए अवसर
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय निवेशकों और कंपनियों से अंगोला में ऊर्जा, खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अफ्रीका, विशेषकर अंगोला, भारत की “वैश्विक दक्षिण” नीति का अभिन्न अंग है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग
भारत और अंगोला के बीच सांस्कृतिक संबंध भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने अंगोला में भारतीय समुदाय के साथ मुलाकात की और शिक्षा, कौशल विकास तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कृति किसी भी रिश्ते को स्थायी बनाने की सबसे मजबूत नींव होती है।
राजनयिक महत्व और रणनीतिक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की “अफ्रीका नीति 2.0” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अफ्रीकी देशों के साथ ऊर्जा और व्यापारिक साझेदारी को सुदृढ़ करना है। अंगोला जैसे देशों में भारत की उपस्थिति चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने में भी मददगार हो सकती है। यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेगी।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अंगोला दौरा भारत-अंगोला संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला ऐतिहासिक कदम है। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच न केवल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ेगा, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों की गहराई भी और अधिक सुदृढ़ होगी। यह भारत की वैश्विक साझेदारी नीति का उज्ज्वल उदाहरण है।
डिस्क्लेमर
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक समाचार रिपोर्टों, सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया स्रोतों पर आधारित है। घटनाक्रम के विकसित होने के साथ विवरणों में बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक पुष्टि के लिए कृपया विदेश मंत्रालय की वेबसाइट या प्रेस विज्ञप्ति देखें।















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