दिनांक: 17 दिसंबर 2025
लेखक: अजय वर्मा
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate – ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व OSD सौम्या चौआरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी से प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मामले को लेकर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो चुकी है।

क्या है शराब घोटाला मामला
छत्तीसगढ़ में सामने आए शराब घोटाले को राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में सरकारी शराब नीति में हेरफेर कर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई। आरोप है कि सिंडिकेट के जरिए शराब की सप्लाई, ट्रांसपोर्ट और बिक्री में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
ईडी की जांच और गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय पिछले काफी समय से इस मामले की मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच कर रहा था। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आए, जिनसे सौम्या चौआरसिया की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसी आधार पर ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया। एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में कई अहम खुलासे होने की संभावना है।
कल कोर्ट में पेशी
गिरफ्तारी के बाद सौम्या चौआरसिया को ईडी की रिमांड पर लिया गया है और उन्हें कल संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। ईडी कोर्ट से आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि घोटाले से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने इसे केंद्र सरकार की एजेंसियों का दुरुपयोग बताया है, जबकि भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करार दिया है। दोनों ही पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने अपनी बात रख रहे हैं।
आगे क्या हो सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरफ्तारी इस मामले में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है। यदि पूछताछ में नए नाम सामने आते हैं, तो जांच का दायरा और भी बढ़ सकता है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक दोनों ही स्तर पर गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।
Disclaimer:
यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में दी गई जानकारी पूरी तरह तथ्यात्मक होने का दावा नहीं करती। किसी भी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है। पाठक किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले आधिकारिक स्रोतों और कानूनी दस्तावेजों की पुष्टि अवश्य करें।













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